उत्तराखंड

नाबालिगों के वाहन चलाने पर परिवहन विभाग सख्त, स्कूलों के आसपास चला विशेष अभियान

संदिग्ध दोपहिया वाहनों की जांच, वाहन स्वामियों को नोटिस जारी; तीन दिन में मांगा स्पष्टीकरण, स्कूल प्रबंधन को भी निर्देश

कलयुग दर्शन (24×7)

सरविन्द्र कुमार (संवाददाता)

हरिद्वार। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देश पर परिवहन विभाग ने नाबालिग छात्र-छात्राओं द्वारा दोपहिया वाहन चलाने पर रोक लगाने और सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विद्यालयों के आसपास विशेष प्रवर्तन अभियान चलाया। अभियान के दौरान स्कूलों के आसपास खड़े संदिग्ध वाहनों की जांच की गई तथा उनके पंजीकृत स्वामियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर लिखित स्पष्टीकरण और आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी निखिल शर्मा ने बताया कि अभियान सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) नेहा झा के नेतृत्व में चलाया गया। इसमें सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) निखिल शर्मा और परिवहन कर अधिकारी वरुणा सैनी भी मौजूद रहीं। अभियान के दौरान विभिन्न विद्यालयों के आसपास की सड़कों, गलियों और पार्किंग स्थलों पर खड़े दोपहिया वाहनों की जांच की गई। ऐसे वाहनों को विशेष रूप से चिह्नित किया गया, जिनका उपयोग नाबालिग छात्र-छात्राओं द्वारा किए जाने की आशंका थी।

वाहन स्वामियों से तीन दिन में मांगा जवाब
परिवहन विभाग ने संदिग्ध वाहनों के पंजीकृत स्वामियों को नोटिस जारी कर पूछा है कि वाहन विद्यालय के आसपास कौन लेकर आया था, वाहन चालक की आयु कितनी थी और क्या उसके पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस था। यदि वाहन किसी नाबालिग को दिया गया था, तो यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि वाहन किसने और किन परिस्थितियों में उपलब्ध कराया। विभाग के अनुसार, वाहन स्वामियों से प्राप्त स्पष्टीकरण और जांच में सामने आए साक्ष्यों के आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

विद्यालय प्रबंधन को भी दिए निर्देश
परिवहन विभाग ने विद्यालय प्रबंधन को निर्देश दिए कि बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के वाहन चलाकर आने वाले छात्र-छात्राओं की पहचान की जाए और उनके अभिभावकों को सूचित किया जाए। साथ ही, ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। विद्यालयों को छात्र-छात्राओं और अभिभावकों के बीच सड़क सुरक्षा नियमों, वाहन चलाने की निर्धारित आयु तथा यातायात कानूनों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए।

नाबालिग को वाहन देने पर अभिभावक भी जिम्मेदार
परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया कि मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के प्रावधानों का उल्लंघन कर वाहन चलाने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। अधिनियम की धारा 199A के तहत निर्धारित परिस्थितियों में किशोर द्वारा मोटर वाहन संबंधी अपराध किए जाने पर वाहन स्वामी अथवा अभिभावक की जिम्मेदारी भी तय हो सकती है। इसके अंतर्गत तीन वर्ष तक के कारावास और 25 हजार रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। विभाग ने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने नाबालिग बच्चों को मोटरसाइकिल या स्कूटी चलाने के लिए न दें। इससे न केवल कानून का उल्लंघन होता है, बल्कि बच्चों और अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा भी खतरे में पड़ती है।

आगे भी जारी रहेगा अभियान
एआरटीओ (प्रवर्तन) नेहा झा ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देशों के अनुपालन में विद्यालयों के आसपास नियमित रूप से अभियान चलाया जाएगा। वहीं, एआरटीओ (प्रशासन) निखिल शर्मा ने कहा कि अभियान का उद्देश्य केवल दंडात्मक कार्रवाई करना नहीं, बल्कि छात्र-छात्राओं, अभिभावकों और विद्यालय प्रबंधन में सड़क सुरक्षा के प्रति जिम्मेदारी विकसित करना भी है। परिवहन विभाग ने सभी विद्यालयों और अभिभावकों से अपील की कि नाबालिगों द्वारा अवैध वाहन संचालन रोकने में सहयोग करें, ताकि संभावित सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके और विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

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