उत्तराखंड

मसूरी: विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर में सिविल जज शमशाद अली ने महिलाओं, बच्चों एवं कमजोर वर्गों को दी कानून की जानकारी

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नरेश कुमार मित्तल (संवाददाता)

मसूरी विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस अवसर सिविल जज शमशाद अली ने कहा कि महिलाओं, बच्चों, गरीबों व कमजोर वर्ग के लोगों को निशुल्क विधिक सहायता एवं सहायता का अधिकार प्रदान किया गया है। मसूरी सनातन धर्म इंटर कॉलेज में विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।

शिविर में मुख्य अतिथि सिविल जज शमशाद अली ने कहा कि महिलाओं, बच्चों, गरीबों व कमजोर वर्ग के व्यक्तियों के लिए निशुल्क विधिक सहायता व सलाह का अधिकार प्रदान किया गया है। जिसको लेकर भारत के संविधान में जीवन या व्यक्तिगत स्वतंत्रता के संबंध में विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया अपनाकर ही कार्रवाई का अधिकार है। उन्होने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्य एवं निःशुल्क विधिक सहायता के बारे में बताते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति आर्थिक अथवा अन्य निर्योग्यता के कारण न्याय पाने से वंचित न होने पाए।

विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 के तहत अनुसूचित जाति/जनजाति, महिला एवं बालक, औद्योगिक कर्मकार, आपदा प्रभावित, दिव्यांगजन एवं जेल में निरुद्ध बंदियों को तथा ऐसे समस्त व्यक्ति जिनकी वार्षिक आय 2 लाख रुपये से कम हो निःशुल्क विधिक सहायता का लाभ ले सकता है।

इसके लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में आवेदन कर सकते है तथा निःशुल्क विधिक सहायता के बारे में 15100 हेल्पलाइन नंबर से भी जानकारी प्राप्त कर सकता है। उन्होने कहा कि प्रत्येक जिले में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण तथा प्रत्येक तहसील में तहसील विधिक सेवा समिति स्थापित है।

यदि आप अपनी समस्याओं का समाधान नहीं कर पा रहे हैं तो आप जिले स्तर पर जिला प्राधिकरण के सचिव से तथा तहसील स्तर पर समिति के सचिव/तहसीलदार से अपनी समस्या बता सकते हैं। उनके द्वारा समाधान अवश्य किया जाएगा। उन्होने कहा कि संविधान में सभी को विधिक सहायता की व्यवस्था की गई है। विधिक रूप से सभी को साक्षर होने की आवश्यकता है।

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