उत्तराखंड

चारधाम यात्रा में अव्यवस्थाओं पर कांग्रेस का हमला, सरकार के दावों पर उठाए सवाल

कलयुग दर्शन (24×7)

नरेश मित्तल (संवाददाता)

हरिद्वार। उत्तराखंड की बहुप्रतीक्षित चारधाम यात्रा को लेकर जहां एक ओर सरकार बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर यात्रा की शुरुआत से ही सामने आ रही घटनाओं ने व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी कड़ी में कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता आलोक शर्मा ने सरकार की तैयारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यात्रा शुरू होते ही अव्यवस्थाओं का बोलबाला दिखाई दे रहा है, जो सरकार के दावों की पोल खोल रहा है। प्रेस क्लब सभागार में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान आलोक शर्मा ने कहा कि चारधाम यात्रा की शुरुआत में ही दो महिलाओं की यमुनोत्री और केदारनाथ में एक बुजुर्ग की मौत हो जाना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि ये घटनाएं केवल हादसे नहीं हैं, बल्कि यह दर्शाती हैं कि सरकार द्वारा किए गए इंतजाम जमीनी स्तर पर पूरी तरह विफल साबित हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने यात्रा को लेकर जितनी बड़ी-बड़ी बातें कही थीं, वास्तविकता उससे बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है। आलोक शर्मा ने कहा कि यात्रा मार्गों पर स्वास्थ्य सुविधाओं की भारी कमी है, जो श्रद्धालुओं के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। उन्होंने विशेष रूप से बद्रीनाथ धाम का जिक्र करते हुए कहा कि वहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती नहीं होना बेहद गंभीर लापरवाही है। इतनी बड़ी धार्मिक यात्रा में जहां लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं, वहां स्वास्थ्य सेवाओं का मजबूत होना अत्यंत आवश्यक है। इसके बावजूद सरकार इस दिशा में पर्याप्त कदम उठाने में विफल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि वीआईपी दर्शन के नाम पर आम श्रद्धालुओं के साथ भेदभाव किया जा रहा है और उनसे लूट-खसोट की जा रही है। उन्होंने कहा कि जहां एक ओर आम श्रद्धालु घंटों लाइन में खड़े होकर दर्शन के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं वीआईपी लोगों को विशेष सुविधा देकर सीधे दर्शन कराए जा रहे हैं। यह न केवल अन्यायपूर्ण है बल्कि धार्मिक आस्था के साथ खिलवाड़ भी है।

कांग्रेस प्रवक्ता ने यह भी कहा कि चारधाम यात्रा उत्तराखंड की पहचान और शान है, लेकिन सरकार इसकी गरिमा को बनाए रखने में नाकाम साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि यात्रा को लेकर कई उच्चस्तरीय बैठकें की जाती हैं, योजनाएं बनाई जाती हैं, लेकिन उनका असर जमीनी स्तर पर दिखाई नहीं देता। व्यवस्थाएं कागजों तक सीमित रह जाती हैं, जबकि धरातल पर श्रद्धालुओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने पिछले वर्ष की घटनाओं का भी उल्लेख करते हुए कहा कि बीते साल भी यात्रा के दौरान कई श्रद्धालुओं की मौत हुई थी। इसके बावजूद सरकार ने कोई ठोस सबक नहीं लिया और इस वर्ष भी वही स्थिति दोहराई जा रही है। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया, तो आगे और भी गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। आलोक शर्मा ने सरकार से मांग की कि चारधाम यात्रा को सुगम, सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने के लिए तत्काल प्रभाव से ठोस कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि यात्रा मार्गों पर स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत किया जाए, पर्याप्त संख्या में विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती की जाए, और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही वीआईपी संस्कृति पर लगाम लगाकर सभी श्रद्धालुओं को समान अवसर दिया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह केवल दावों और प्रचार तक सीमित न रहे, बल्कि वास्तविकता में सुधार लाने के लिए गंभीर प्रयास करे। चारधाम यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह लाखों लोगों की आस्था का केंद्र है, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती। पत्रकार वार्ता के अंत में आलोक शर्मा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी लगातार इस मुद्दे को उठाती रहेगी और श्रद्धालुओं के हितों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेगी। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ, तो जनता के बीच इस मुद्दे को लेकर व्यापक आंदोलन किया जाएगा। चारधाम यात्रा को लेकर उठे इन सवालों के बाद अब यह देखना होगा कि सरकार इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और व्यवस्थाओं में सुधार के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल, यात्रा के शुरुआती दौर में सामने आई इन घटनाओं ने प्रशासन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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