उत्तराखंड

बच्चों का बचपन बचाना पूरे समाज की नैतिक जिम्मेदारी: सुनीता चौधरी

गरीबी, बेरोजगारी और शिक्षा का अभाव बाल श्रम व बाल अपराध के प्रमुख कारण

कलयुग दर्शन (24×7)

मो नदीम (संपादक)

हरिद्वार। बाल श्रम और बाल अपराध की बढ़ती समस्या समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है। वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता एवं हरिद्वार बाल कल्याण समिति की सदस्य सुनीता चौधरी ने कहा कि आर्थिक गरीबी, बेरोजगारी, शिक्षा का अभाव और सामाजिक असमानता बाल श्रम एवं बाल अपराध के प्रमुख कारण हैं। इन परिस्थितियों के चलते जिन बच्चों के हाथों में कलम और किताबें होनी चाहिए, वे मजदूरी करने और अपराध की राह पर जाने को मजबूर हो रहे हैं। इससे उनका बचपन प्रभावित होने के साथ ही उज्ज्वल भविष्य भी खतरे में पड़ जाता है। सुनीता चौधरी ने कहा कि सरकार बच्चों के संरक्षण, शिक्षा और बेहतर भविष्य के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से प्रयास कर रही है। वहीं, बाल कल्याण समिति भी जरूरतमंद, असुरक्षित और संकटग्रस्त बच्चों को रेस्क्यू कर सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने तथा उनके पुनर्वास के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

हालांकि, बाल श्रम और बाल अपराध जैसी समस्याओं का स्थायी समाधान केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं पर प्रभावी रोक लगाने के लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। बच्चों को बाल श्रम से बचाने, शिक्षा से जोड़ने और अपराध की राह पर जाने से रोकने के लिए परिवार, समाज, प्रशासन और संबंधित संस्थाओं को मिलकर प्रयास करने होंगे। सुनीता चौधरी ने अपील की कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित बचपन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सम्मानजनक जीवन का अवसर मिलना चाहिए। बच्चों से मजदूरी कराने के बजाय उन्हें पढ़ाई के लिए प्रेरित किया जाए और संकट में फंसे बच्चों की समय रहते सहायता की जाए। उन्होंने कहा कि बच्चों का बचपन बचाना केवल सरकार का दायित्व नहीं, बल्कि पूरे समाज की नैतिक जिम्मेदारी है।

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