उत्तराखंड

पुलिस स्मृति दिवस पर शहीदों को श्रद्धांजलि, मुख्यमंत्री ने कीं आठ घोषणाएं

पुलिस के 1,600 रिक्त पदों पर जल्द होगी भर्ती, थानों का बजट दोगुना करने और पुलिस अस्पताल के उच्चीकरण का ऐलान

कलयुग दर्शन (24×7)

मो नदीम (संपादक)

देहरादून। पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर मंगलवार, 21 अक्टूबर को पुलिस लाइन देहरादून स्थित शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री, पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ सहित वरिष्ठ अधिकारियों एवं गणमान्य व्यक्तियों ने पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों के शहीद जवानों को पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान शहीद पुलिसकर्मियों के परिजनों को शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने पुलिस व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और पुलिसकर्मियों के कल्याण के लिए आठ महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने उत्तराखंड पुलिस की विभिन्न इकाइयों में लगभग 1,600 रिक्त पदों पर जल्द भर्ती शुरू करने, थानों एवं चौकियों में कार्मिकों की आवश्यकता के अनुसार पदों की समीक्षा करने और विवेचकों को आधुनिक जांच किट उपलब्ध कराने की घोषणा की। थानों के आवश्यक कार्यों के लिए वार्षिक बजट चार करोड़ से बढ़ाकर आठ करोड़ रुपये किया जाएगा। इसके अलावा प्रदेश के सभी पुलिस मॉडर्न स्कूलों को बेहतर बनाने, देहरादून में पुलिसकर्मियों के लिए ट्रांजिट हॉस्टल एवं मल्टीस्टोरी बैरक बनाने और पुलिस अस्पताल के उच्चीकरण की घोषणा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस एवं अर्द्धसैनिक बल देश की आंतरिक सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पिछले एक वर्ष में देशभर में 154 जवानों ने कर्तव्य पालन के दौरान सर्वोच्च बलिदान दिया, जिनमें उत्तराखंड पुलिस के उपनिरीक्षक स्वर्गीय विनोद कुमार भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि खाकी वर्दी साहस, अनुशासन और राष्ट्रसेवा का प्रतीक है। पुलिसकर्मी त्योहारों पर भी परिवार से दूर रहकर जनता की सुरक्षा में जुटे रहते हैं। उन्होंने नशे और साइबर अपराध को गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि नशे की रोकथाम के लिए त्रिस्तरीय एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स गठित की गई है। साइबर अपराध पर अंकुश लगाने के लिए लगभग 32 करोड़ रुपये की लागत से स्टेट साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर का निर्माण किया जा रहा है। महिलाओं की सुरक्षा के लिए प्रत्येक थाने में महिला हेल्प डेस्क के अंतर्गत क्विक रिस्पॉन्स टीम गठित की गई है। मुख्यमंत्री ने कांवड़ यात्रा में लगभग पांच करोड़ और चारधाम यात्रा में 60 लाख से अधिक श्रद्धालुओं की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने में पुलिस के योगदान की सराहना की। उन्होंने बताया कि इस वर्ष 319 पुलिसकर्मियों को विभिन्न पदकों एवं सम्मान चिह्नों से अलंकृत किया गया है। पुलिस आवास संतुष्टि दर 18 प्रतिशत से बढ़कर 22 प्रतिशत हुई है, जिसे 30 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इस वर्ष 785 पुलिसकर्मियों को पदोन्नति भी दी गई है।

डीजीपी ने शहीदों के बलिदान को किया नमन
पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने कहा कि 21 अक्टूबर पूरे देश के लिए भावनात्मक दिन है। यह दिवस उन वीर जवानों के सर्वोच्च बलिदान की याद दिलाता है, जिन्होंने देश की सुरक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। वर्ष 1959 में लद्दाख के हॉट स्प्रिंग क्षेत्र में सीआरपीएफ के दस जवानों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए मातृभूमि की रक्षा में बलिदान दिया था। उन्हीं की स्मृति में प्रत्येक वर्ष पुलिस स्मृति दिवस मनाया जाता है। डीजीपी ने बताया कि आजादी के बाद से अब तक देशभर में 35 हजार से अधिक पुलिसकर्मी कर्तव्य निर्वहन के दौरान शहीद हो चुके हैं। पिछले एक वर्ष में देशभर के 154 पुलिस एवं केंद्रीय सशस्त्र बलों के जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया। इनमें उत्तराखंड पुलिस के उपनिरीक्षक स्वर्गीय विनोद कुमार भी शामिल हैं। इस वर्ष ड्यूटी के दौरान निरीक्षक अभिसूचना स्वर्गीय मनोज मनराल और मुख्य आरक्षी आईआरबी स्वर्गीय तारा सिंह को भी खोया गया। राज्य गठन के बाद से अब तक उत्तराखंड पुलिस के 206 जवान कर्तव्य पालन के दौरान शहीद हुए हैं। उन्होंने कहा कि शहीदों के परिवारों को सम्मान और सहयोग देना पुलिस विभाग का दायित्व है। पुलिस शहीद कोष से इस वर्ष अब तक आश्रित परिवारों को लगभग 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है।

वहीं, पुलिस सैलरी पैकेज योजना के तहत विभिन्न बैंकों के माध्यम से दिवंगत पुलिसकर्मियों के परिवारों को लगभग 31 करोड़ रुपये की अनुग्रह राशि प्रदान की जा चुकी है। डीजीपी ने बताया कि पुलिसकर्मियों एवं उनके परिजनों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं देने के लिए एम्स ऋषिकेश में 24 घंटे पुलिस हेल्प डेस्क स्थापित की जा रही है। आपात उपचार के लिए इस वर्ष 25 पुलिसकर्मियों को जीवन रक्षक निधि से एक करोड़ 16 लाख रुपये की अग्रिम सहायता दी गई। प्रदेश के पांच पुलिस मॉडर्न स्कूलों में तीन हजार से अधिक बच्चे पढ़ रहे हैं। इस वर्ष 446 मेधावी बच्चों को उच्च शिक्षा, मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए 34 लाख रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की गई। कार्यक्रम में सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, कैबिनेट मंत्री खजान दास, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक सविता कपूर, जिला पंचायत अध्यक्ष सुखविंदर कौर, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, मुख्य सूचना आयुक्त राधा रतूड़ी, सचिव गृह शैलेश बगोली सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। सभी ने शहीद पुलिसकर्मियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

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