उत्तराखंड

पर्वतीय मैदानी एकता समिति ने किया बैठक का आयोजन

कलयुग दर्शन (24×7)

सागर कुमार (सह संपादक)

हरिद्वार। पर्वतीय मैदानी एकता समिति की बैठक का आयोजन सुभाषनगर में किया गया। इस दौरान समिति में नई नियुक्तियां भी की गई। पवन ठाकुर को जिलाध्यक्ष, बिक्रमजीत सिंह को प्रदेश मीडिया प्रभारी, सागर ठाकुर जिला मीडिया प्रभारी, सुरेंद्र ठाकुर संगठन मंत्री नियुक्त किए गए। पर्वतीय मैदानी एकता मंच के प्रदेश अध्यक्ष (एडवोकेट) पीके अग्रवाल ने कहा कि जिनके द्वारा खाई खोदने का काम किया जा रहा है। इससे प्रदेश की भी उपेक्षा होती है और देश में गलत संदेश जाता है। उत्तराखंड में रहने वाले सभी उत्तराखंडी हैं। जिन्होंने भी मैदानवासियों के लिए बात कही है वह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। हम एकता का परिचय देंगे एवं किसी को भी प्रदेश की जनता के बीच ‌दरार डालने का काम नहीं करने देंगे।

सरकार को अपनी नीति स्पष्ट करनी चाहिए। और साथ ही उन्होंने बताया कि 16 नवंबर को एक विशाल रैली का आयोजन पर्वतीय मैदानी एकता मंच के द्वारा किया जा रहा है जो कि हरकी पोङी से लेकर ललतारो पुल तक रहेगी। जिसमें लोगों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जाएगा। इसके साथ ही पर्वतीय एवं मैदानी एकता का संदेश भी दिया जाएगा। उत्तराखंड राज्य का गठन इसीलिए किया गया है कि राज्य के अंतर्गत आने वाले सभी लोग आपस में मिलजुल कर रहे हैं और उनके अधिकार सभी को मिले जो बताता है कि हम सब एक हैं। उत्तराखंड राज्य के अंतर्गत आने वाले सभी लोग एक हैं इनको कोई बाँट नहीं सकता।

महिला प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह ने बताया कि जो मैदानी एवं पर्वतियों के बीच में जो खाई थोड़ी बहुत ही थी अब कुछ लोगों ने उस खाई को बड़ा कर दिया है। उस खाई को भरने का कार्य पर्वतीय मैदानी एकता मंच करेगा और अस्थायी निवास प्रमाण पत्र एवं मूल निवास प्रमाण पत्र का मुद्दा भी सरकार के आगे रखेंगे। जिन प्रमाण पत्रों को लेकर सरकार के द्वारा मैदानी और पर्वतीय क्षेत्र के लोगों के बीच भेदभाव किया गया है हम सरकार से मैदानी लोगों के लिए उस भेदभाव को दूर करने की मांग भी करेंगे। जिस तरीके से सरकार के पर्वतीय विधायकों ने विधानसभा सत्र के दौरान कहा कि गंगा का पानी रोक देंगे और मैदानी क्षेत्र का पानी रोक कर इन लोगों को भूखे मार देंगे और यह लोग उत्तराखंडी नहीं है। ऐसे विधायकों को सरकार को पदमुक्त करना चाहिए। उन विधायकों पर उत्तराखंड सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए। इस तरीके के भड़काऊ बयानों के ऊपर प्रेम चंद अग्रवाल ने जरासा बयान दिया था। तब उनसे इस्तीफा दिलवा दिया गया था।

आज मैदानी लोगों के ऊपर इन लोगों ने जो कीचड़ उछाला है यह बर्दाश्त से बाहर है उनको माफी मांगनी पड़ेगी या अपने पद से इस्तीफा देना पड़ेगा रकार को इसमें मौन नहीं रहना चाहिए अपनी चुप्पी तोड़नी ही पड़ेगी यह हरिद्वार की आवाज है। उन्होंने कहा कि आगामी चुनाव में पर्वतीय विधायकों द्वारा दिए गए बयान से सरकार को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। जिलाध्यक्ष पवन ठाकुर ने कहा कि समिति पर्वतीय और मैदान के लोगों में फर्क नहीं करती। समिति के सदस्य सभी को आपस में जोड़कर चलते हैं। आने वाले समय में जनता ऐसे नेताओं को जवाब देगी। जनता सरकार से त्रस्त है और जो भेदभाव की नीति अपनाई जा रही है उसका सड़क पर विरोध होगा। किसी को भी बांटने की राजनीति नहीं करने दी जाएगी। राज्य निर्माण में सभी का योगदान रहा है। 16 नवंबर को एक बड़ी विरोध रैली हरकी पैड़ी से ऋषिकुल मैदान तक निकाली जाएगी। इस अवसर पर राजेंद्र पाराशर, किरन सिंह, अरुणा शर्मा, लव दत्ता, जितेंद्र चौधरी, विक्रमजीत सिंह, सर्विंद्र कुमार, जितेंद्र शर्मा, मो. नदीम, महावीर चौधरी, सतीश चंद्र गर्ग, वंदना गुप्ता, चंद्रमा प्रसाद आदि उपस्थित रहे।

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