
कलयुग दर्शन (24×7)
सागर कुमार (सह संपादक)
हरिद्वार। श्री पंचायती अखाडा निर्मल कनखल की शाखा शास्त्री निवास में ब्रह्मलीन संत हरभजन सिंह की 17वी षोडसी मे निर्मल अखाडे के संत महंत एवं तेरह अखाडों के संत महापुरुषों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर कोठारी महंत जसविंदर सिंह महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन संत हरभजन सिंह महाराज त्याग और तपस्या की प्रतिमूर्ति थे उन्होंने सदा अपना जीवन संत महापुरुषों के चरणों में व्यतीत किया गरीब निर्धन परिवारों के उत्थान में योगदान दियां। उन्होंने हमेशा ही गंगा गौ सेवा के प्रकल्प चलाएं उनके अधूरे कार्यों को पूरा करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। निर्मल अखाडे के सचिव महंत देवेंद्र सिंह शास्त्री ने ब्रह्मलीन संत हरभजन सिंह महाराज को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वह एक दिव्य आत्मा थे उन्होंने अपना पूरा जीवन अपने श्रद्धालु भक्तों के जीवन को सफल बनाने में और अपने गुरुजनों के बताएं मार्ग पर चलकर उन्होंने सदा अखाडें के मंहतों की पूरी सेवा की अखाडे के उत्थान में उन्होंने अपना जीवन समर्पित किया। उनके अचानक चले जाने से अखाडे को जो छती पहुंची है। उसको पूरा तो नहीं किया जा सकता पर उनके बताए हुए मार्ग पर चलकर उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि देना हम सबका कर्तव्य है।

नवनियुक्त संत इंद्रजीत सिंह ने कहा कि गुरूजनो और संत महापुरुषों की सेवा करना ही मेरे जीवन का लक्ष्य है जिसे मैं निष्ठा से निर्वहन करुंगा और गुरुजनों के बताए हुए मार्ग पर चलकर उनके अधूरे कार्यों को पूर्ण करूंगा। भारी पुलिस सुरक्षा के बीच बनाए गए मंहत निर्मल अखाडे के संतो की सुझ बुझ से कार्यक्रम में विवाद करने वाले लोगो को समझाकर विवाद को सुलझाया गया तब जाकर संत इन्द्रजीत को मंहताई सौपी सम्पन्न कराई। इस अवसर पर महंत खेम सिंह पंचायती अखाडा निर्मल के सचिव महन्त देवेन्द्र सिंह, जी कोठारी महन्त जसविंदर सिंह शास्त्री, महंत खेम सिंह महन्त निर्भय सिंह, महंत सुखमन सिंह, महंत गुरमीत सिंह देवपुरा आश्रम महन्त जगजीत सिंह निर्मल संतपूरा महंत मोहन सिंह भजनगढ, महंत अजीत सिंह, महंत लाल सिंह, महंत गज्जन सिंह महंत बीर सिंह, महन्त हरचरण सिंह, निर्मल छावनी महंत श्यामसुन्दर सिंह संत खेम सिहं मंहत मोहन सिंह मंहत सुखमल सिंह, समाजसेवी अतुल शर्मा, सरदार रमणीक सिंह आदि उपस्थित थे।
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