कांग्रेस विधायकों ने की बजट सत्र की अवधि तीन सप्ताह रखने की मांग
विधायकों को सदन में अपने प्रश्न रखने और सरकार से जवाब के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए: रवि बहादुर

कलयुग दर्शन (24×7)
हिमांशु (संवाददाता)
हरिद्वार। कांग्रेस विधायकों के प्रतिनिधिमंडल ने ज्वालापुर विधायक रवि बहादुर के नेतृत्व में जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित कर बजट सत्र की अवधि तीन सप्ताह रखने की मांग की है। विधायकों ने मांग की है कि बजट सत्र की कार्यवाही इस प्रकार निर्धारित की जाए कि प्रश्नकाल और विधायी कार्यों के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध हो। उनका कहना है कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए सदन में खुली और विस्तृत चर्चा आवश्यक है। ज्ञापन में विधायकों ने राज्य की मौजूदा परिस्थितियों को गंभीर बताते हुए कानून व्यवस्था, महिलाओं की सुरक्षा, वन्य जीवों के हमलों से हो रही जनहानि, पेयजल संकट और आपदा पीड़ितों के पुनर्वास जैसे मुद्दों पर तत्काल चर्चा की मांग की है। विधायकों ने आरोप लगाया कि हर घर नल जैसी योजनाओं के बावजूद कई क्षेत्रों में पेयजल की समस्या बनी हुई है। पिछले वर्ष आई प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित परिवार अब भी मुआवजे और पुनर्वास की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

ज्ञापन में विधायकों ने यह भी कहा कि राज्य में अब भी कई कानून और नियमावली उत्तर प्रदेश काल के लागू हैं, जिन्हें उत्तराखण्ड की परिस्थितियों के अनुसार संशोधित किया जाना चाहिए। राज्य निर्माण के 25 वर्ष बाद भी कई विधायी सुधार लंबित हैं। ज्ञापन में विधायकों ने सुझाव दिया कि बजट सत्र के दौरान आवश्यक संशोधन विधेयक लाकर राज्य की प्रशासनिक और कानूनी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जाए। ज्वालापुर विधायक रवि बहादुर ने कहा कि उत्तराखंड में विधानसभा सत्र अन्य राज्यों की तुलना में कम समय के लिए आयोजित होता है। जिससे जनता की समस्याएं सदन में पूरी तरह से नहीं उठ पातीं। प्रदेश के 70 विधायकों को अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़े प्रश्न सदन में रखने और सरकार से स्पष्ट जवाब लेने का अवसर मिलना चाहिए। प्रतिनिधिमंडल में विधायक हाजी फुरकान अहमद, विधायक ममता राकेश, विधायक अनुपमा रावत, हारून चौधरी, सागर बेनीवाल, महरूफ सलमानी, तबरेज आलम आदि शामिल रहे।
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