रमजान और होली सौहार्द और एकता का प्रतीक: इसरार सलमानी

कलयुग दर्शन (24×7)
मो नदीम (संपादक)
हरिद्वार। पूर्व पार्षद एवं समाजसेवी इसरार सलमानी ने कहा है कि रमजान का महीना और रंगों का त्योहार होली इस वर्ष एक साथ आ रहे हैं, जो भारत की गंगा-जमुनी तहजीब और बहुलतावादी संस्कृति की जीवंत मिसाल पेश करते हैं। रमजान संयम, इबादत, दया, सेवा और आत्मचिंतन का प्रतीक है, जबकि होली प्रेम, उल्लास, बैर-मिटाव और नए संबंधों की शुरुआत का उत्सव है। श्री सलमानी ने कहा है कि ये दोनों पर्व एक-दूसरे के पूरक बनकर हमें याद दिलाते हैं कि हमारा असली बल विविधता में छिपी एकता है। देश व उत्तराखंड में हिंदू-मुस्लिम भाई-बहन सदियों से इन त्योहारों को साथ मिलकर मनाते आए हैं कहीं होली के रंग रमजान के रोजे के साथ मिलते हैं, तो कहीं जुमे की नमाज के बाद एक-दूसरे को गले लगाते हैं। यह सौहार्द हमारी साझा विरासत है, जो समाज को मजबूत बनाती है।

श्री सलमानी ने सभी से अपील है कि इन पवित्र अवसरों पर आपसी सम्मान, संयम और भाईचारे को बनाए रखें। किसी भी प्रकार की अफवाहों या उकसावे पर ध्यान न दें। एक-दूसरे के त्योहारों का आदर करें। रोजेदारों को परेशान न करें और होली के रंगों में भी संयम बरतें। शांति समितियों, स्थानीय प्रशासन और सामुदायिक नेताओं के साथ मिलकर सौहार्दपूर्ण माहौल बनाए रखें। श्री सलमानी ने कहा है कि भारत की असली ताकत उसकी एकता में है। आइए, इस रमजान और होली को प्रेम, सद्भाव और सामाजिक समरसता का अविस्मरणीय अवसर बनाएं। रमजान मुबारक और होली की हार्दिक शुभकामनाएं दी।
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