उत्तराखंड

त्याग, तपस्या और सेवा की प्रतिमूर्ति थे ब्रह्मलीन महंत जानकी दास: महंत परमेश्वर दास

गुरूदेव की शिक्षाओं का अनुसरण करते हुए सनातन का प्रचार प्रसार ही उद्देश्य: महंत गणेश दास

कलयुग दर्शन (24×7)

दीपक कुमार (संवाददाता)

हरिद्वार। ब्रहमलीन महामंडलेश्वर महंत जानकी दास महाराज की पुण्य तिथी पर संत समाज ने भावपूर्ण स्मरण करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। भूपतवाला स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर में लक्ष्मी निवास आश्रम के परमाध्यक्ष महंत गणेशदास महाराज के संयोजन में आयोजित श्रद्धांजलि समारोह को संबोधित करते हुए महंत परमेश्वर दास महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर महंत जानकी दास महाराज त्याग, तपस्या और सेवा की प्रतिमूर्ति थे। उनका त्यागमयी जीवन और सनातन के प्रचार प्रसार में योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। उन्होंने कहा कि महंत गणेश दास महाराज जिस प्रकार अपने ब्रह्मलीन गुरू महंत जानकी दास महाराज के अधूरे कार्यो को आगे बढ़ा रहे हैं। वह सभी के लिए प्रेरणादायी है। महंत रघुवीर दास महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन महंत जानकी दास महाराज परम् विद्वान और तपस्वी संत थे। उनके दिखाए मार्ग पर चलते हुए मानव कल्याण में योगदान करने का संकल्प ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि है।

महामंडलेश्वर स्वामी रामेश्वर दास एवं जगद्गुरू स्वामी अयोध्याचार्य महाराज ने कहा कि गुरूजनों के प्रति सच्ची श्रद्धा और उनकी शिक्षाओं का अनुसरण करने से ही आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। महंत गणेश दास महाराज की उनके गुरू के प्रति निष्ठा अत्यन्त सराहनीय है। महंत गणेश दास महाराज एवं महंत श्याम दास महाराज ने फूलमाला पहनाकर सभी संतों का स्वागत किया। महंत गणेश दास महाराज ने सभी संतों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पूज्य गुरूदेव ब्रह्मलीन महंत जानकी दास महाराज की शिक्षाओं का अनुसरण करते हुए आश्रम की सेवा संस्कृति का विस्तार और समाज में धर्म व अध्यात्म का प्रचार प्रसार करना ही उनके जीवन का उद्देश्य है। इस अवसर पर महंत नारायण दास पटवारी, महंत श्याम दास, स्वामी शिवानंद, महंत सूरज दास, महंत दुर्गादास, महंत प्रह्लाद दास, महंत प्रेमदास, महंत बिहारी शरण, महंत जयराम दास, स्वामी चिदविलासानंद, महंत प्रमोद दास, महंत अंकित शरण, स्वामी रविदेव शास्त्री, स्वामी दिनेश दास, महंत किशन दास, महंत कमल मुनि, पंडित वीरेंद्र तिवारी, महंत रघुवर दास सहित बड़ी संख्या में संत और श्रद्धालु मौजूद रहे।

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