उत्तराखंड

ज्ञान, विवेक और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करती नवरात्र साधना: स्वामी कैलाशानंद गिरी

कलयुग दर्शन (24×7)

दीपक कुमार (संवाददाता)

हरिद्वार। निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने कहा कि मां दुर्गा चैत्र नवरात्र का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना को समर्पित है। मां भगवती का ब्रह्मचारिणी स्वरूप साधक को तप, त्याग, संयम और अडिग संकल्प की प्रेरणा देता है। श्री दक्षिण काली मंदिर में आयोजित नवरात्र उत्सव के दौरान भक्तों को संबोधित करते हुए स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने कहा कि नवरात्रों में नौ दिनों तक मां भगवती की आराधना से ज्ञान, विवेक और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने कहा कि वर्ष में दो बार आने वाले नवरात्र मां भगवती की कृपा प्राप्त करने का सबसे उत्तम अवसर हैं।

नवरात्रों में प्रत्येक व्यक्ति को मां भगवती की आराधना अवश्य करनी चाहिए। नौ दिनों तक पूर्ण विधि विधान से मां भगवती के सभी स्वरूपों की आराधना करें। साथ ही देवी स्वरूपा कन्याओं के संरक्षण संवर्द्धन का संकल्प लेते हुए बालिकाओं को शिक्षा और जीवन में आगे बढ़ने समान अवसर प्रदान करें। ऐसा करने से ही नवरात्रा आराधना की पूर्णता होगी। स्वामी कैलाशानंद गिरी के शिष्य स्वामी अंवतिकानंद ब्रह्मचारी ने बताया कि चैत्र नवरात्र उत्सव के उपलक्ष्य में मंदिर में विशेष अनुष्ठान का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त शामिल हो रहे हैं।

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