दशनाम गोस्वामी समाज ने हर्षोल्लास से मनाया आदि गुरु शंकराचार्य महाराज का प्राकट्य जन्मोत्सव
दशनाम गोस्वामी समाज सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा: प्रमोद गिरि

कलयुग दर्शन (24×7)
दीपक झा (संवाददाता)
हरिद्वार। विश्वगुरु शंकराचार्य दशनाम गोस्वामी समाज ने प्राचीन हनुमान घाट हनुमान मंदिर के मुख्य महंत रवि पुरी महाराज के सानिध्य में श्रवणनाथ मठ में पूजा अर्चना कर हर्षोल्लास से आदिगुरु शंकराचार्य महाराज जी का प्राकट्य जन्मोत्सव मनाया। आदि गुरु शंकराचार्य महाराज जी के प्राकट्य जन्मोत्सव पर प्राचीन हनुमान घाट हनुमान मंदिर के मुख्य महंत रवि पुरी महाराज ने कहा कि भारतीय सनातन परंपरा के महान दार्शनिक, अद्वैत वेदांत के प्रणेता एवं धर्मजागरण के अग्रदूत आदि गुरु शंकराचार्य जी महाराज का जीवन चरित्र भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का अमूल्य धरोहर है। उन्होंने कहा कि आदि गुरु शंकराचार्य महाराज ने देश की आध्यात्मिक एकता को मजबूत करने के लिए दशनाम परंपरा की स्थापना की, जिसका उद्देश्य साधु-संतों को संगठित कर समाज को धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिकता के मार्ग पर अग्रसर करना था। उनके प्रयासों से सनातन धर्म को नई दिशा और ऊर्जा मिली, जो आज भी समाज को मार्गदर्शन प्रदान कर रही है। इस अवसर पर विश्वगुरु शंकराचार्य दशनाम गोस्वामी समाज के राष्ट्रीय महासचिव प्रमोद गिरि ने कहा कि आदि गुरु शंकराचार्य महाराज द्वारा स्थापित दशनाम गोस्वामी समाज सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वर्तमान समय में भी दशनाम गोस्वामी समाज आदि गुरु शंकराचार्य महाराज जी सिद्धांतों पर चलते हुए धर्म रक्षा, संस्कारों के प्रसार और समाज सेवा के कार्यों में सक्रिय रूप से योगदान दे रहा है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझें और उसे आगे बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाएं। इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप गिरि ने कहा कि दशनाम गोस्वामी समाज लोगों को सभी वर्गों को एकजुट करके आदि गुरु शंकराचार्य के बताए मार्ग पर चलकर सनातन धर्म की गरिमा और परंपराओं को बनाए रखने के लिए कार्य करना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियों को हमारी समृद्ध संस्कृति का लाभ मिल सके।

महिला प्रदेश अध्यक्ष सीमा गिरि ने कहा कि आदि गुरु शंकराचार्य महाराज जी ने सनातन धर्म के संरक्षण संवर्धन हेतु संपूर्ण भारत का भ्रमण किया। उन्होंने विभिन्न स्थानों पर शास्त्रार्थ कर वैदिक धर्म की पुनर्स्थापना की तथा समाज में व्याप्त अज्ञान और कुरीतियों को दूर करने का कार्य किया। प्रदेश उपाध्यक्ष शत्रुघ्न गिरी एवं समाजसेवी डा अशोक गिरि ने कहा कि आदि गुरु शंकराचार्य महाराज जी का जीवन त्याग, तपस्या, ज्ञान और राष्ट्र एकता का संदेश देता है। उनका समूचा जीवन भारतीय संस्कृति के उत्थान और आध्यात्मिक चेतना के जागरण के लिए समर्पित रहा। गोस्वामी समाज के वरिष्ठ नेता अजय गिरि एवं शिवम गिरि ने कहा कि आदि गुरु शंकराचार्य महाराज के विचार आज भी मानवता को सत्य, ज्ञान और आत्मबोध का मार्ग दिखाते हैं। उनके आदर्श और शिक्षाएं समाज को धर्म, संस्कृति और नैतिकता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं। इस अवसर पर शहर व्यापार मंडल अध्यक्ष राजीव पाराशर, प्रमोद गिरि, सीमा गिरि, सोनू गिरि, प्रदीप गिरि, शत्रुघ्न गिरि, अजय गिरि, शिवम गिरि, संदीप गोस्वामी, मनोज गिरि, कपिल पाराशर, कुलदीप गिरि, प्रदीप गिरि, गौरव गोस्वामी, विशाल गिरि, गर्वित गिरि, योगेश त्यागी, रितेश पांडे, आशुतोष भारद्वाज, अनिल गिरि, सुमित कुमार सहित गोस्वामी समाज के सम्मानित जन उपस्थित रहे।



