उत्तराखंड

श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन के पूर्व श्रीमहंत रघुमुनि ने बताया अखाड़े के मुखिया महंत और कार्यकारिणी को अवैध

मुखिया महंत और कार्यकारिणी पर जल्द होगी कानूनी कार्रवाई, अखाड़ा परिषद भी करेगा दंडात्मक कार्रवाई: महंत रघुमुनि

कलयुग दर्शन (24×7)

राकेश वालिया (संवाददाता)

हरिद्वार। श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन के पूर्व श्रीमहंत रघुमुनि ने आरोप लगाया है कि अखाड़े के मुखिया महंत और उनकी कार्यकारणी अवैध है। मुखिया महंत दुर्गादास और उनकी कार्यकारिणी ने न्यायालय के आदेशों का अपमान करते हुए एवं अखाड़े के निमयों पर ताक पर रखकर कांचीपुरम में उत्तर पंगत के मुखिया महंत का चुनाव किया और 5 महंतो को निकालने का तुगलकी फरमान जारी किया है। जो पूरी तरह अवैध और मनमाना है। जिसमें उनकी हताशा और निराशा साफ दिखाई देती है। महंत रघुमुनि ने कहा कि अखाड़े की नियमावली में ऐसा कोई नियम नहीं है। जिसके द्वारा किसी महंत को अखाड़े से आजीवन बहिष्कृत किया जा सके। सम्पूर्ण भारत के सभी मंडलों में उदासीन संत महंतों द्वारा बैठक करके महंत दुर्गा दास, महंत अद्वैतानंद और महंत महेश्वरदास को अखाड़े के नियम विरुद्ध कार्य करने एवं न्यायालय के आदेश को न मानने के कारण उनकी भर्त्सना करते हुए तीनों का सामाजिक बहिष्कार किया गया है। उन्हें श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन के किसी भी मन्दिर, आश्रम मठ मकान में प्रवेश की अनुमति नहीं है। महंत रघुमुनि ने बताया कि सिविल जज (सीनियर डिवीजन) प्रयागराज ने अखाड़े की नियमावली का उल्लंघन कर किए गए उनके निष्कासन को अवैध घोषित किया है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने भी महंत दुर्गादास उनकी कार्यकारिणी वैध नहीं माना है और संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। इनके द्वारा आज तक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया है।

महंत रघुमुनि ने बताया कि श्रीमहंत दुर्गादास ने 2026 के प्रयागराज महाकुंभ के पूर्व जालसाजी से रामनवमी दास को मुखिया महंत घोषित किया। जबकि इस पद पर उनके पक्ष में कोर्ट का स्टे था। इसलिए रामनवमी दास को आज तक महंती का कोई अधिकार प्राप्त नहीं है। यही स्थिति चुने गए नए मुखिया महंत की भी होगी। क्योंकि उनका चुनाव वैध कार्यकारणी द्वारा नहीं किया गया है। महंत रघुमुनि ने यह भी आरोप लगाया कि दुर्गादास और उनके गुर्गे अखाड़े के आश्रमों से अवैध वसूली कर रहे हैं। धन नहीं देने पर कोठारी और कारोबारियों को डराया धमकाया, मारा पीटा और अखाड़े से निकालने का डर दिखाया जा रहा है है। विरोध करने पर अखाड़े के तीन मुकामी महंतों को निकाल दिया गया। अखाड़े की उज्जैन स्थित कई संपत्तियों को अनधिकृत रूप से पट्टे पर देकर मोटी कमाई की गई है। हरिद्वार के बादशाहपुर के मुकामी महंत निरंजन दास की मृत्यु के पश्चात 40 लाख रुपये से अधिक के सोने चांदी के आभूषण गायब कर दिए गए। जबकि नियमों के अनुसार उनकी मृत्यु के पश्चात यह अखाड़े की संपत्ति है।

निरंजन दास के खाते में जमा 50,00,000 रूपए निकलवाने का प्रयास भी किया गया। लेकिन मैनेजर की सतर्कता से खाते से पैसा निकालने के प्रयास कामयाब नहीं हो पाए। अखाड़े के सभी महंतो और मुकामियों पर अनैतिक दबाव बनाकर उन्हें सत्यनिष्ठा से भटकाने के लिए असंवैधानिक, अनैतिक एवं न्यायालय के आदेशों का अपमान करने का घोर निंदनीय कार्य किया जा रहा है। रजिस्ट्रार सोसाइटीज एवं चिट ने अखाड़े के सभी आश्रमों के खातों की जांच के आदेश दिए थे। जिसका अनुपालन नहीं होने पर खातों से लेनदेन को प्रतिबंधित करते हुए केवल अति आवश्यक खर्च करने की अनुमति दी है। जिसके कारण महंत दुर्गा दास अपना मानसिक संतुलन खो चुके हैं और अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं। न्यायालय की अवमानना एवं अखाड़ा विरोधी कार्य करने के कारण जल्द ही उनके खिलाफ न्यायालय एवं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद कठोर दंडात्मक कार्रवाई करने जा रहे हैं।

Related Articles

Back to top button