उत्तराखंड

हत्या नहीं, झूठी साजिश का खेल! बूढ़पुर गोलीकांड में मृतक के तीन साथी ही निकले आरोपी, पुलिस ने खोला सनसनीखेज राज

कलयुग दर्शन (24×7)

सरविन्द्र कुमार (संवाददाता)

हरिद्वार। हरिद्वार पुलिस ने बूढ़पुर जट्ट में हुए चर्चित गोलीकांड का ऐसा खुलासा किया है जिसने पूरे मामले की तस्वीर ही बदल दी। जिस हत्या को लेकर तीन लोगों पर गंभीर आरोप लगाए गए थे, पुलिस की निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच में वे पूरी तरह निर्दोष निकले। हैरानी की बात यह रही कि मृतक के साथ मौजूद उसके तीन साथियों ने ही पुरानी रंजिश का फायदा उठाकर निर्दोष लोगों को हत्या के मुकदमे में फंसाने की साजिश रच डाली। पुलिस ने पूरे मामले का पर्दाफाश करते हुए तीनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया है और घटना में प्रयुक्त अवैध तमंचा भी बरामद कर लिया है। जानकारी के अनुसार, 11 जुलाई 2026 की शाम कोतवाली मंगलौर पुलिस को सूचना मिली कि ग्राम बूढ़पुर जट्ट स्थित एक खेत में एक युवक को गोली लग गई है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और गंभीर रूप से घायल सौरभ पुत्र राजेन्द्र, निवासी बूढ़पुर जट्ट, को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद क्षेत्र में सनसनी फैल गई। मृतक के परिजनों की ओर से दी गई तहरीर के आधार पर पुलिस ने रोबिन, अनुज और प्रदुमन के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया। चूंकि घटना उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे संवेदनशील क्षेत्र की थी, इसलिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार नवनीत सिंह भुल्लर ने मामले की निष्पक्ष और गहन जांच के निर्देश दिए। पुलिस अधीक्षक ग्रामीण और क्षेत्राधिकारी मंगलौर के निर्देशन में प्रभारी निरीक्षक भगवान महर के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई।

जांच के दौरान पुलिस टीम ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। फोरेंसिक तथ्यों का परीक्षण किया गया, प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों के बयान दर्ज किए गए तथा 112 पर सूचना देने वाले व्यक्ति समेत अन्य संबंधित लोगों से विस्तृत पूछताछ की गई। पुलिस ने घटनास्थल से मिले भौतिक साक्ष्यों का भी गहन विश्लेषण किया। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, पुलिस को शुरुआती तहरीर और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों में बड़ा विरोधाभास दिखाई देने लगा। स्वतंत्र गवाहों के बयान भी हत्या की कहानी से मेल नहीं खा रहे थे। इससे पुलिस को पूरे घटनाक्रम पर संदेह हुआ और जांच की दिशा बदल दी गई। गहन पूछताछ में जो सच सामने आया, उसने सभी को चौंका दिया। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि मृतक सौरभ और उसके साथी ग्राम शकरपुर, जनपद मुजफ्फरनगर के कुछ लोगों से पुरानी रंजिश रखते थे। घटना वाले दिन सौरभ अपने साथियों के साथ मोहम्मदपुर जट्ट से एक अवैध तमंचा लेकर बूढ़पुर जट्ट पहुंचा था। वहां तमंचे को खोलकर देखने और जांचने के दौरान अचानक गोली चल गई, जो सीधे सौरभ को जा लगी। गंभीर चोट लगने के कारण उसकी मौत हो गई। सौरभ की मौत के बाद उसके साथ मौजूद तीनों साथियों ने अपने ऊपर कार्रवाई से बचने और पुरानी दुश्मनी निकालने के लिए एक नई कहानी गढ़ डाली। उन्होंने पुलिस को झूठी सूचना देकर यह दर्शाने की कोशिश की कि अनुज, रोबिन और प्रदुमन ने सौरभ की गोली मारकर हत्या कर दी है। उनका मकसद पुरानी रंजिश के चलते इन तीनों निर्दोष लोगों को हत्या के मुकदमे में फंसाना था। हालांकि हरिद्वार पुलिस ने जल्दबाजी में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय वैज्ञानिक और निष्पक्ष विवेचना को प्राथमिकता दी।

घटनास्थल के साक्ष्य, गवाहों के बयान और पूछताछ के आधार पर पुलिस ने झूठी कहानी की परत-दर-परत जांच की और आखिरकार पूरे षड्यंत्र का खुलासा कर दिया। पुलिस ने घटनास्थल पर मौजूद तीनों साथियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसमें उन्होंने सच्चाई स्वीकार कर ली। आरोपियों में से एक के कब्जे से घटना में प्रयुक्त अवैध तमंचा भी बरामद कर लिया गया। पुलिस के अनुसार, विवेचना में वास्तविक तथ्य सामने आने के बाद मुकदमे में आवश्यक वैधानिक संशोधन किए गए हैं। अब मामले में गैर-इरादतन हत्या सहित अन्य संबंधित धाराएं शामिल की गई हैं और तीनों आरोपियों के खिलाफ नियमानुसार विधिक कार्रवाई की जा रही है। गिरफ्तार आरोपियों में सुमित पुत्र सुखबीर निवासी शकरपुर, थाना पुरकाजी (जनपद मुजफ्फरनगर), डिम्पल पुत्र नाहर निवासी मोहम्मदपुर जट्ट, थाना मंगलौर तथा आशीष पुत्र बिन्दर निवासी मोहम्मदपुर जट्ट शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, सुमित के खिलाफ उत्तर प्रदेश में आयुध अधिनियम और अन्य गंभीर धाराओं में पहले से मुकदमे दर्ज हैं, जबकि डिम्पल के खिलाफ हरिद्वार जनपद में भी आपराधिक मामला दर्ज है। पुलिस टीम। प्रभारी निरीक्षक भगवान महर, वरिष्ठ उपनिरीक्षक सुखपाल सिंह मान, उपनिरीक्षक आनंद मेहरा, उपनिरीक्षक मंसूर अली, कांस्टेबल पंकज, कांस्टेबल सुधीर और कांस्टेबल रणवीर।

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