आस्थाउत्तराखंड

तीर्थनगरी के नील पर्वत स्थित चंडी देवी मंदिर का बीकेटीसी ने संभाला चार्ज, हाईकोर्ट में प्रत्येक सप्ताह पेश होगी वर्क रिपोर्ट

कलयुग दर्शन (24×7)

दीपक झा (संवाददाता)

हरिद्वार। तीर्थनगरी के नील पर्वत स्थित चंडी देवी मंदिर का संचालन अब बीकेटीसी करेगी। आज बीकेटीसी ने चंडी देवी मंदिर के प्रबंधन का चार्ज ले लिया गया है। बीकेटीसी सीईओ विजय थपलियाल अपनी टीम के साथ चंडी देवी मंदिर पहुंचे। जहां उन्होंने सबसे पहले चंडी देवी मंदिर के दर्शन किये। इसके बाद चंडी देवी मंदिर का चार्ज लिया। इस दौरान बीकेटीसी के सीईओ विजय थपलियाल ने बताया हाईकोर्ट के आदेश का पालन करते हुए बीकेटीसी की टीम ने चंडी देवी ने संचालन की जिम्मेदारी ली है। उन्होंने अपना स्टाफ भी वहां पर बिठा दिया है। ये टीम साप्ताहिक रिपोर्ट हाईकोर्ट को देगी। फिलहाल उन्होंने चार स्टाफ की टीम चंडी देवी मंदिर में बिठाई है। ये टीम हर दिन की रिपोर्ट तैयार करेगी। इस मामले में मंदिर के ट्रस्टी ने कहाकि हमें संरक्षक के तौर पर हाईकोर्ट की ओर से बीकेटीसी मिली है। इसके बाद मंदिर में सुविधाएं श्रद्धालुओं को मिलेंगी। इससे मंदिर का संचालन बेहतर तरीके से होगा। साथ ही नई व्यवस्थाओं की भी शुरुआत होगी।

उल्लेखनीय है कि चंडी देवी मंदिर के तत्कालीन महंत रोहित गिरी पर बिना तलाक लिए दूसरी शादी का आरोप था। इसके साथ महंत ने अपनी पहली पत्नी पर मंदिर में चोरी करने का आरोप लगाया था। जिसे लेकर मुकदमा भी दर्ज करवाया गया। मामले की सुनवाई के बाद न्यायमूर्ती राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने महंत की पहली पत्नी को अग्रिम जमानत दे दी थी। साथ ही इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 13 अगस्त की तिथि नियत की गई है। मामले के अनुसार महंत की पहली पत्नी ने अग्रिम जमानत के लिए उच्च न्यायलय में याचिका दायर की थी। जिसमें कहा गया कि उनका विवाह मंदिर में महंत के साथ हुआ। उसके बाद महंत ने उन्हें बिना बताए दूसरी शादी कर ली। उसके बाद वर्तमान में वे लिव इन में रह रहे हैं। पता चलने पर उनके द्वारा एक प्राथमिकी दायर की गई। इसके बाद महंत ने मंदिर चोरी का मुकदमा उनके खिलाफ दर्ज करवा दिया। इसी को आधार मानकर उन्होंने उच्च न्यायलय में अग्रिम जमानत के लिए प्रार्थना पत्र पेश किया था। जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उन्हें राहत दी थी। कोर्ट ने कहा अग्रिम आदेश तक मंदिर का संचालन बदरी केदार मंदिर समिति कमेटी करेगी। जिसके चलते आज समिति के पदाधिकारियों ने मंदिर का चार्ज ले लिया।

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