उत्तराखंड

गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में रक्षाबंधन के पावन अवसर पर सामूहिक श्रावणी उपाकर्म संस्कार का भव्य आयोजन

कलयुग दर्शन (24×7)

सागर कुमार (सह संपादक)

हरिद्वार। गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में रक्षाबंधन के पावन अवसर पर सामूहिक श्रावणी उपाकर्म संस्कार का भव्य आयोजन हुआ। इसमें देश-विदेश से अपने गुरुधाम पहुँचे हजारों साधकों ने भाग लिया। इस दौरान हेमाद्रि संकल्प व दश स्थान आदि का वैदिक कर्मकाण्ड शांतिकुंज के प्रशिक्षित आचार्यों की टीम द्वारा विधिवत संपन्न कराया गया। आज से प्रारंभ हुए विशेष वृक्षारोपण अभियान की शुरुआत एक पौधे की पूजा कर की गई। इस अभियान के अंतर्गत वृक्षो रक्षति रक्षित: की भावना से पूरे मास में देशभर में लाखों पौधे रोपने का संकल्प लिया गया है। अपने संदेश में अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख श्रद्धेया शैलदीदी ने कहा कि रक्षाबंधन सामाजिक पर्व के साथ ही आत्मिक सुरक्षा, संयम एवं कर्तव्य परायणता का प्रतीक है। हमें एक-दूसरे के आत्मिक विकास व सुरक्षा हेतु समर्पित रहना चाहिए।

रक्षासूत्र हमें यह स्मरण कराता है कि हम सदा सत्कर्म और सच्चाई की डोर से बंधे रहें। कुलाधिपति श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि रक्षाबंधन भाई बहिन के पवित्र पर्व के साथ ही भारतीय संस्कृति की उस गहराई को दर्शाता है, जहाँ नारी शक्ति को संरक्षण ही नहीं, सम्मान व सामथ्र्य दिया जाता है। गायत्री परिवार इस पर्व को सभी के आत्मोत्कर्ष और लोकमंगल हेतु आत्मिक संकल्प के रूप में मनाता है। इस अवसर पर शांतिकुंज कार्यकर्ता, देवसंस्कृति विश्वविद्यालय परिवार सहित देश-विदेश से आये हजारों साधकों को अखिल विश्व गायत्री परिवार की प्रमुख स्नेहसलिला श्रद्धेया शैलदीदी ने अपने करकमलों से रक्षासूत्र बांधा और उनके जीवन में आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद दिया। वहीं देसंविवि, शांतिकुंज और देश विदेश से आई बहिनों ने गायत्री परिवार के अभिभावक श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी को रक्षासूत्र बांधकर गुरु-संस्कृति की परंपरा को सजीव किया। इस भव्य आयोजन में उपस्थित साधकों ने भावपूर्ण वातावरण में वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ रक्षासूत्र बंधवाकर जीवन में आत्मिक सुरक्षा व सद्गुणों के विकास का संकल्प लिया।

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