उत्तराखंड

विधि विधान के साथ गंगा में प्रवाहित की गई ब्रह्मलीन महंत हरभजन सिंह की अस्थियां

विद्वान और मृदुभाषी संत थे ब्रहमलीन महंत हरभजन सिंह: महंत जसविंदर सिंह

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दीपक झा (संवाददाता)

हरिद्वार। श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल के संत शास्त्री निवास के महंत हरभजन सिंह की अस्थियां पूर्ण विधि विधान से सती घाट पर गंगा मंें प्रवाहित की गयी। अखाड़े के पूर्व अध्यक्ष श्रीमहंत बलवीर सिंह के शिष्य महंत हरभजन सिंह विगत दिनों ब्रह्मलीन हो गए थे। रविवार को ब्रह्मलीन महंत हरभजन सिंह के शिष्य महंत इंद्रजीत सिंह ने अखाड़े के संतो व भक्तो के साथ अस्थि कलश वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सती घाट पर गंगा में प्रवाहित किया। अस्थि प्रवाह के बाद श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल के कोठारी महंत जसविंदर सिंह महाराज के संयोजन में अखाड़े के संतों ने ब्रहमलीन महंत हरभजन सिंह को श्रद्धासुमन अर्पित किए। श्रद्धांजलि देते हुए महंत जसविंदर सिंह महाराज ने कहा कि मानव कल्याण के लिए जीवन समर्पित करने वाले ब्रह्मलीन महंत हरभजन सिंह विद्वान और मृदुभाषी संत थे। अखाड़े की परंपरांओं को आगे बढ़ाने और धर्म प्रचार मंे उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। सभी को उनके दिखाए मार्ग पर चलते हुए मानव सेवा का संकल्प लेना चाहिए।

महंत खेमसिंह व संत बलवीर सिंह ने कहा कि ब्रह्मलीन महंत हरभजन सिंह त्याग, तपस्या और सेवा की प्रतिमूर्ति थे। भले ही आज वे संसार में मौजूद नहीं हैं। लेकिन उनकी शिक्षाएं सदैव समाज का मार्गदर्शन करती रहेंगी। महंत खेमसिंह ने बताया कि ब्रह्मलीन महंत हरभजन सिंह निर्मला छावनी स्थित श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल की शाखा शास्त्री निवास के महंत थे। महंत इंद्रजीत सिंह ने कहा कि वे सौभाग्यशाली हैं कि गुरू के रूप में उन्हें ब्रह्मलीन महंत हरभजन सिंह जैसे विद्वान संत का सानिध्य प्राप्त हुआ। पूज्य गुरूदेव से प्राप्त ज्ञान और शिक्षाओं का अनुसरण करते हुए समाज और संतों की सेवा करना और गुरू के अधूरे कार्यो को आगे बढ़ाना ही उनका उद्देश्य है। महंत श्यामसुंदर सिंह, महंत विक्रम सिंह, महंत कुलदीप सिंह, महंत निर्भय सिंह, संत बलवीर सिंह, संत बंता सिंह, संत धर्मपाल सिंह, संत निहाल सिंह, सेवक आनन्द सिखवाहा, यशपाल ने भी ब्रह्मलीन महंत हरभजन सिंह को श्रद्धांजलि दी।

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