आखिर शिक्षा नगरी में भी पांव पसार रहा है जिस्मफरोशी का धंधा, क्या गरीबी और लाचारी के कारण ही इस धंधे की ओर रुख कर रही हैं ये महिलाएं?

कलयुग दर्शन (24×7)
नरेश मित्तल (संवाददाता)
रुड़की। रोडवेज बस स्टैंड और रुड़की टॉकीज के दरमियानी मार्ग पर आधा दर्जन भर महिलाएं अक्सर ग्राहकों का इंतजार करती हुई नजर आती हैं। खुलेआम हो रहे इस धंधे में लिप्त ये महिलाएं राहगीरों को खुद आवाज दे देकर बुलाती हैं, जिसके चलते सभ्य लोगों के शिक्षा नगरी रुड़की नगर का नाम कलंकित हो रहा है। रोजगार व गरीबी से त्रस्त ग्रामीण अंचलों की अधिकांश युवा तथा उम्र-दराज महिलाओं को अन्य नगरों की भांति रुड़की में भी सरेआम जिस्मफरोशी के लिए आमंत्रण देते देखा जा सकता है।

इस मार्ग पर सुबह से ही यह लाचार महिलाएं अपने ग्राहकों का इंतजार ही नहीं करती, बल्कि चलते हुए राहगीरों से उनकी मंशा पूछकर उनको होटल चलने की दावत भी देती हैं। अक्सर देखने में आता है कि बड़े-बड़े होटलों में जहां धनाढ्य परिवारों की महिलाएं ऐसे धंधों में मोटी रकम कमाती हैं, वहीं रुड़की में भी सड़क के किनारे खड़ी इन महिलाओं की वेशभूषा व चालढाल से लगता है कि यह ग्रामीण अंचलों की गरीबी से त्रस्त महिलाएं ही हैं, जो खुद को सरेआम बेचने पर मजबूर हैं।

पूर्व में भी कई बार दैनिक समाचार पत्रों में इस विषय में समाचार प्रकाशित किए जा चुके हैं,जिसपर संज्ञान लेते हुए पुलिस ने उचित कार्रवाई भी की, किंतु कुछ दिनों ब्रेक लगने के बाद एक बार फिर से यह धंधा शुरू हो गया। ऐसा ही दृश्य हरिद्वार में भी रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड के पास अक्सर देखने को मिलता रहता था, किन्तु कुछ दिनों से रुड़की में भी खुलेतौर पर यह धंधा दिखाई दे रहा है।

राज्य महिला आयोग की पूर्व सदस्य रश्मि चौधरी का कहना है कि उक्त मामला उनके संज्ञान में भी आया है, यदि इन महिलाओं की आर्थिक स्थिति दयनीय है तो उनकी ओर ध्यान दिए जाने की जरूरत है और उनके लिए उचित रैन बसेरे अथवा स्थान चिन्हित करना चाहिए, वहीं नगर निगम क्षेत्र अंतर्गत आने वाले यहां के सभ्य नागरिकों का भी मानना है कि नगर निगम को भी इस दयनीय स्थिति पर तथा इन महिलाओं के लिए प्रधानमंत्री के विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत इनको किसी हुनर की ट्रेनिंग अथवा योजना के अनुरूप लाभान्वित करना चाहिए। रुड़की जोकि शिक्षित और सभ्य लोगों की नगर कहा जाता है, यहां पर इस प्रकार के सरेआम कृत्य पूरे नगर के लोगों के लिए शर्म की बात ही मानी जा सकती है।

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