दून-रायपुर सड़क के नामकरण पर सियासत तेज, विनोद बड़थ्वाल की विरासत फिर चर्चा में
विनोद बड़थ्वाल केवल एक नाम नहीं, राज्य निर्माण के दौर की यादों और योगदान का सम्मान है: शुभम गिरी

कलयुग दर्शन (24×7)
नरेश मित्तल (संवाददाता)
देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर स्मृतियों और सम्मान का सवाल गरमा गया है। समाजवादी पार्टी के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष महंत शुभम गिरी ने दून-रायपुर सड़क का नाम स्वर्गीय विनोद बड़थ्वाल के नाम पर रखने की मांग को लेकर सरकार को घेरा है। उन्होंने कड़ा रुख इख्तियार करते हुए कहा कि यदि शीघ्र निर्णय नहीं हुआ तो पार्टी आंदोलन का रास्ता अपनाएगी।
(पुराने फैसले, नए सवाल)
महंत शुभम गिरी ने याद दिलाया कि स्वर्गीय विनोद बड़थ्वाल जो समाजवादी आंदोलन के संस्थापक चेहरों में रहे और उत्तराखंड राज्य निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने वालों में गिने जाते हैं जिनका निधन 12 अप्रैल 2016 को हुआ था। उनके अनुसार, तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने 14 दिसंबर 2016 को रायपुर क्षेत्र में 807.93 लाख रुपये की लागत से बने बॉक्स कल्वरट और देहरादून-रायपुर सड़क के सीमेंटेशन का लोकार्पण किया था। उसी अवसर पर कुछ संस्थानों के नामकरण की घोषणा भी हुई थी, लेकिन संबंधित सड़क के नाम को लेकर अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी।

(सम्मान में देरी क्यों?)
महंत शुभम गिरी का कहना है कि विनोद बड़थ्वाल ने लंबे समय तक समाजवादी पार्टी से जुड़े रहकर उत्तराखंड के विकास के लिए संघर्ष किया। देहरादून क्षेत्र में उन्हें एक जुझारू और प्रभावशाली नेता के रूप में जाना जाता था। उन्होंने सवाल उठाया “ऐसे व्यक्तित्व के नाम पर अब तक सड़क क्यों नहीं रखी गई? यह केवल एक नाम नहीं, बल्कि राज्य निर्माण के दौर की यादों और योगदान का सम्मान है।
(सरकार से सीधी अपील)
सपा नेता ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रमुख सचिव से मामले में तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है। साथ ही चेताया कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो मुख्यमंत्री से भेंट के साथ-साथ व्यापक आंदोलन भी किया जाएगा।
(राजनीतिक गलियारों में चर्चा)
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा हल्के व्यंग्य के साथ भी चल रही है कि फाइलें शायद सड़क से ज्यादा लंबी दूरी तय कर रही हैं। हालांकि, जानकार मानते हैं कि नामकरण जैसे विषयों पर आम सहमति और प्रशासनिक प्रक्रिया दोनों की जरूरत होती है। सरकार की ओर से अभी औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि मामला उठने के बाद संबंधित विभाग स्थिति स्पष्ट करेगा।
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