अध्यात्म और सेवा का प्रमुख केंद्र बनेगा गुरू-जो-दर धाम: स्वामी हरिचेतनानंद
संत महापुरूषों के आशीर्वाद से सेवा और संस्कार के उद्देश्य को प्राप्त करेगा धाम: संत साईं भरतलाल मसंद

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विजय कुमार (ब्यूरो चीफ)
हरिद्वार। गुरू-जो-दर फाउंडेशन द्वारा श्रवणनाथ नगर में स्थापित किए गए गुरू-जो-दर धाम का शुभारंभ महाशिवरात्रि के अवसर पर संत महापुरूषों के सानिध्य में समारोह पूर्वक किया गया। धाम में भगवान शिव की दिव्य प्रतिमा भी स्थापित की गयी है। संत साईं भरतलाल मसंद के मार्गदर्शन में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद ने कहा कि धर्मनगरी हरिद्वार शिव शक्ति के तप, त्याग और दिव्य मिलन की भूमि है। प्रतिवर्ष देश दुनिया से गंगा स्नान और अन्य आध्यात्मिक कार्यो के लिए लाखों श्रद्धालु हरिद्वार आते हैं। संत साईं भरतलाल मसंद एवं साईं रमेशलाल के प्रयासों से स्थापित किया गया गुरू-जो-धर धाम अध्यात्म और सेवा का प्रमुख केंद्र बनेगा। संत साईं भरतलाल मसंद ने सभी संत महापुरूषों का स्वागत करते हुए कहा कि सेवा और संस्कार गुरू-जो-दर फाउंडेशन की पहचान हैं।

देश की आध्यात्मिक राजधानी हरिद्वार में गुरू-जो-दर धाम की स्थापना का उद्देश्य संत समाज और श्रद्धालुओं की सेवा और समाज में संस्कारों को बढ़ावा देना है। संत महापुरूषों के आशीर्वाद से इस उद्देश्य को पूरा किया जाएगा। संत प्रशांत लाल महाराज ने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि और हरिद्वार संतों की नगरी है। हरिद्वार के संतों के श्रीमुख से प्रसारित होने वाले आध्यात्मिक संदेशों से पूरे विश्व को मार्गदर्शन प्राप्त होता है। गुरू-जो-दर धाम संतों के साथ सहभागी बनकर धर्म और अध्यात्म के प्रचार प्रसार में योगदान करेगा। स्वामी रविदेव शास्त्री ने कहा कि संतों के सानिध्य में किया गया प्रत्येक कार्य सफल होता है। गुरू-जो-दर धाम सेवा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करेगा। राजेश नैथानी ने फूलमाला पहनाकर सभी संतों का स्वागत किया। इस अवसर पर गुरू भरतलाल मसंद, संत सुशील कुमार, संत प्रशांत लाल, कृपाण दास कुंदानी, ट्रस्टी मनहर लाल, किशोर बानी, राजेश नैथानी सहित कई संत महंत और ट्रस्टी मौजूद रहे।
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