उत्तराखंड

संतों और सनातन का अपमान सहन नहीं किया जाएगा: श्रीमहंत रविंद्रपुरी

धर्म संस्कृति की रक्षा करना अखाड़ों का दायित्व: श्रीमहंत दुर्गादास

कलयुग दर्शन (24×7)

मो नदीम (संपादक)

हरिद्वार। सप्तऋषि क्षेत्र स्थित हरिसेवा आश्रम में आयोजित संतों की बैठक में सनातन धर्म संस्कृति के प्रचार प्रसार और संरक्षण संवर्धन को लेकर चर्चा की गयी। बैठक में संतों ने कहा कि संतों का अपमान कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन के श्रीमहंत दुर्गादास महाराज की अध्यक्षता में आयोजित बैठक को संबोधित करते अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि सनातन धर्म संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन संस्कृति है। सनातन धर्म ने हमेशा दुनिया का मार्गदर्शन करते हुए शांति और सद्भाव की राह दिखायी है। लेकिन आज जिस प्रकार सनातन पर कुठाराघात किया जा रहा है। पूरा संत समाज एकजुट होकर इसका विरोध करेगा। उन्होंने कहा कि किसी ना किसी बहाने संतों को अपमानित किया जा रहा है।

संतों और सनातन का अपमान कतई सहन नहीं किया जाएगा। श्रीमहंत दुर्गादास महाराज ने कहा कि धर्म संस्कृति की रक्षा करना अखाड़ांे का दायित्व है। सभी अखाड़े देश के समस्त संत समाज को एकजुट कर सनातन पर किए जा रहे हमलों का विरोध करेंगे। हरिसेवा आश्रम के परमाध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद ने कहा कि समाज को सांस्कृतिक रूप से एकजुट कर सनातन का परचम फहराने में संत समाज और अखाड़ों का अहम योगदान है। लेकिन जिस प्रकार संतों और सनातन को अपमानित करने का प्रयास किया जा रहा है। वह चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि इसके विरोध में सभी संतों को एकजुट होकर एक मंच पर आना होगा। बैठक में महामंडलेश्वर स्वामी अनंतानंद, स्वामी चिदविलासानंद, भक्त दुर्गादास, स्वामी हरिवल्लभ दास शास्त्री, स्वामी रविदेव शास्त्री, महंत रामनौमी दास, स्वामी हरिचेतनानंद, महंत प्रेमदास, महंत हनुमान दास, महंत मुरली दास, महंत कैवल्यानंद, महंत लक्ष्मण दास, महंत सेवक दास, महंत जयेंद्र मुनि सहित कई संत शामिल रहे।

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