उत्तराखंड

दिलों को जोड़ता है होली पर्व: स्वामी कैलाशानंद गिरी

श्री दक्षिण काली घाट पर संतो और भक्तों ने खेली रंग गुलाल और पुष्पों से होली

कलयुग दर्शन (24×7)

मो नदीम (संपादक)

हरिद्वार। निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर डा.स्वामी कैलाशानंद गिरी ने श्री दक्षिण काली मंदिर घाट पर संतों और भक्तों के साथ रंग, गुलाल और पुष्पों से होली खेली। इस दौरान सभी को होली की शुभकामनाएं देते हुए स्वामी कैलाशानंद गिरी ने कहा कि सनातन संस्कृति पर्वो की संस्कृति है। भारत में मनाए जाने वाले सभी पर्व एक सार्थक संदेश समाज को देते हैं। रंगों का पर्व होली दिलों को आपस में जोड़ता है। होली के दिन जब लोग एक दूसरे को रंग लगाते हैं और गले मिलते हैं, तो मन का सारा कलुष मिट जाता है। जिससे आपस में सद्भाव और प्रेम बढ़ता है। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति के अनुरूप परंपरागत रूप से ही सभी पर्व मनाएं।

महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद एवं महामंडलेश्वर स्वामी ललितानंद गिरी ने कहा कि रंगों और उमंगों का पर्व होली जीवन में उल्लास का भाव उत्पन्न करता है। जिससे आगे बढ़ने और समाज के प्रति सार्थक योगदान करने की प्रेरणा मिलती है। स्वामी कैलाशानंद गिरी के शिष्य स्वामी अवंतिकानंद ब्रह्मचारी ने फूलमाला पहनाकर सभी संत महापुरूषों का स्वागत किया। इस अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी संतोषानंद, महामंडलेश्वर स्वामी अनंतानंद, स्वामी रविदेव शास्त्री, स्वामी चिदविलासानंद, स्वामी सुतिक्ष्ण मुनि, स्वामी दिनेश दास, स्वामी नागेंद्र महाराज, आचार्य पवनदत्त मिश्र सहित बड़ी संख्या में संत महापुरूष और श्रद्धालु मौजूद रहे।

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