उत्तराखंड

‘लेडी सिंघम’ पर आरोप या साजिश? ड्रग इंस्पेक्टर अनीता भारती प्रकरण ने खड़े किए कई सवाल

कलयुग दर्शन (24×7)

मो नदीम (संपादक)

हरिद्वार। हरिद्वार में तैनात ड्रग इंस्पेक्टर अनीता भारती के खिलाफ हाल ही में सामने आए रिश्वत के आरोपों ने अब एक बड़े विवाद का रूप ले लिया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए व्हाट्सएप चैट, कथित लेन-देन और वीडियो ने पूरे मामले को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। हालांकि, इन आरोपों की टाइमिंग और प्रस्तुत किए गए तथ्यों को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं, जिससे मामला संदिग्ध नजर आने लगा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह वास्तव में भ्रष्टाचार का मामला है या फिर एक सख्त और सक्रिय अधिकारी को बदनाम करने की सुनियोजित साजिश। बताया जा रहा है कि जिन आरोपों को लेकर इतना बवाल मचा है, उनकी टाइमिंग बेहद अहम है। हाल ही में अनीता भारती द्वारा हरिद्वार में कई फर्जी फार्मा कंपनियों, अवैध दवा निर्माण इकाइयों और नशीली दवाओं के कारोबार से जुड़े लाइसेंस निरस्त किए गए थे। इन कार्रवाइयों से करोड़ों रुपये के कारोबार पर असर पड़ा, जिससे कई बड़े हित प्रभावित हुए। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि वर्षों से जनपद में तैनात इस अधिकारी पर पहले कभी इस तरह के आरोप क्यों नहीं लगे, जबकि अब अचानक मात्र 15 हजार रुपये की कथित रिश्वत का मामला सामने आना कई संदेह पैदा करता है। स्वयं अनीता भारती ने भी इस पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यदि उनके मन में कोई डर होता तो वे कथित चैट को पहले ही डिलीट कर देतीं। उनका यह भी कहना है कि वायरल किए गए चैट और वीडियो को एडिट कर आंशिक रूप से प्रस्तुत किया गया है, जबकि पूरी चैट हिस्ट्री सार्वजनिक नहीं की गई। अनीता भारती ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे झूठा और मनगढ़ंत बताया है। उनका कहना है कि यह सब उनकी छवि को धूमिल करने के उद्देश्य से किया गया है।

सूत्रों के अनुसार, उन्होंने इस पूरे मामले में कानूनी कार्रवाई की तैयारी भी शुरू कर दी है और निष्पक्ष जांच की मांग की है। हरिद्वार में अनीता भारती को “लेडी सिंघम” के नाम से जाना जाता है। इसका कारण उनकी सख्त कार्यशैली और अवैध दवा कारोबार के खिलाफ लगातार की गई कार्रवाई है। उन्होंने नकली और घटिया दवाओं के खिलाफ कई अभियान चलाए हैं और मेडिकल माफिया के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। वर्ष 2025 में उनकी अगुवाई में की गई कार्रवाई में हरिद्वार-रुड़की क्षेत्र की करीब 15 दवाइयां गुणवत्ता परीक्षण में फेल पाई गई थीं, जिसके बाद कई कंपनियों को नोटिस जारी किए गए और जांच शुरू हुई। इस पूरे प्रकरण में अब राजनीतिक एंगल भी सामने आने लगा है। आरोप लगाने वालों में कुछ ऐसे लोगों के नाम चर्चा में हैं, जिनके कथित तौर पर राजनीतिक संबंध बताए जा रहे हैं और जिनका सीधा हित दवा कारोबार और लाइसेंस से जुड़ा हुआ है। अंदरखाने यह भी चर्चा है कि एक विशेष समूह उन अधिकारियों को निशाना बनाता है, जो सिस्टम में पारदर्शिता लाने की कोशिश करते हैं। सोशल मीडिया के इस दौर में बिना जांच के किसी भी मामले को वायरल कर देना एक नया ट्रेंड बनता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अधूरी या भ्रामक जानकारी के आधार पर किसी अधिकारी की छवि खराब करना न केवल गलत है, बल्कि यह प्रशासनिक व्यवस्था के लिए भी चुनौती बन सकता है। अनीता भारती के मामले में भी बिना आधिकारिक पुष्टि के आरोपों का प्रसार किया गया, जिससे आम जनता के बीच भ्रम की स्थिति बनी। इस घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हर सख्त और ईमानदार अधिकारी को इसी तरह निशाना बनाया जाएगा। वहीं, अनीता भारती ने स्पष्ट कहा है कि उन्हें न्यायपालिका और जांच एजेंसियों पर पूरा भरोसा है और वे चाहती हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच हो तथा जो भी दोषी हो, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

Related Articles

Back to top button