उत्तराखंड

गर्मी से बचाव के लिए बड़ा फैसला: अब हर स्कूल में बजेगी ‘वॉटर बेल’, हीटवेव से निपटने के सख्त निर्देश

कलयुग दर्शन (24×7)

सागर कुमार (सह संपादक)

हरिद्वार। प्रदेश में बढ़ती गर्मी और संभावित हीटवेव के खतरे को देखते हुए राज्य सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सभी स्कूलों में नियमित अंतराल पर ‘वॉटर बेल’ बजाने के निर्देश दिए हैं, ताकि छात्र-छात्राएं समय-समय पर पानी पीते रहें और डिहाइड्रेशन से सुरक्षित रह सकें। यह निर्देश बुधवार को ग्रीष्मकालीन तैयारियों की समीक्षा बैठक के दौरान दिए गए, जिसमें सभी जिलों के अधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े। बैठक में मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि गर्मियों में विद्यार्थियों का स्वास्थ्य सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने विद्यालयों के समय में आवश्यकता अनुसार बदलाव करने, कक्षाओं में पर्याप्त वेंटिलेशन सुनिश्चित करने और स्कूलों में ओआरएस व आवश्यक दवाओं का पर्याप्त भंडारण रखने के निर्देश दिए। साथ ही बच्चों को हीटवेव से बचाव के उपायों की व्यवहारिक जानकारी देने पर भी जोर दिया गया। उन्होंने जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि जिन क्षेत्रों में पानी की किल्लत की संभावना हो, वहां गर्मियों के दौरान निर्माण कार्यों पर अस्थायी रोक लगाई जाए। इसके अलावा बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों और बाजारों में शुद्ध पेयजल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया। मुख्य सचिव ने हीटवेव से निपटने के लिए राज्य से लेकर ग्राम स्तर तक सभी विभागों के समन्वित प्रयासों पर जोर दिया। प्रत्येक जनपद में हीटवेव एक्शन प्लान तैयार करने, संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करने और वहां विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए। साथ ही 24 घंटे कंट्रोल रूम संचालित कर आपात स्थितियों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया। पेयजल व्यवस्था को लेकर उन्होंने कहा कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक स्थानों- जैसे बस स्टैंड, बाजार, पंचायत भवन आदि पर स्वच्छ पानी की उपलब्धता लगातार बनी रहनी चाहिए।

जल संकट वाले क्षेत्रों में पहले से टैंकर, नलकूप और वैकल्पिक जल आपूर्ति की व्यवस्था तैयार रखने के निर्देश दिए गए, ताकि किसी भी स्थिति में लोगों को परेशानी न हो। स्वास्थ्य सेवाओं के संदर्भ में भी विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए। सभी अस्पतालों में हीटवेव से प्रभावित मरीजों के लिए पर्याप्त बेड, विशेष वार्ड, दवाइयां, ओआरएस और आइस पैक की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया। एम्बुलेंस सेवाओं को भी सुदृढ़ बनाने और उनमें जरूरी संसाधन रखने के निर्देश दिए गए। साथ ही चिकित्सा स्टाफ को हीटवेव प्रबंधन के लिए प्रशिक्षित करने और आम जनता को इसके लक्षणों व बचाव के प्रति जागरूक करने पर बल दिया गया। मुख्य सचिव ने श्रमिकों और खुले में काम करने वाले लोगों की सुरक्षा को भी अहम बताया। उन्होंने निर्देश दिए कि कार्य समय में बदलाव किया जाए और दोपहर के समय भारी काम से बचा जाए। कार्यस्थलों पर छायादार स्थान, पीने का पानी, ओआरएस और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था अनिवार्य रूप से की जाए। इसके साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर अस्थायी कूलिंग स्पेस और पानी के प्याऊ स्थापित करने के निर्देश भी दिए गए। ऊर्जा आपूर्ति को लेकर भी सतर्कता बरतने को कहा गया। बढ़ती मांग को देखते हुए निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने, ट्रांसफार्मरों और उपकरणों का पर्याप्त स्टॉक रखने तथा वैकल्पिक योजनाएं तैयार रखने के निर्देश दिए गए, ताकि किसी भी स्थिति में आवश्यक सेवाएं प्रभावित न हों। जनपद हरिद्वार की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने बताया कि सभी संबंधित विभागों को पहले ही आवश्यक तैयारियों के निर्देश दिए जा चुके हैं। जल संस्थान, स्वास्थ्य विभाग, श्रम विभाग और विद्युत विभाग को अपनी-अपनी जिम्मेदारियों के तहत व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने को कहा गया है। बैठक में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. आर.के. सिंह, मुख्य शिक्षा अधिकारी नरेश कुमार हल्दयानी, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मीरा रावत सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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