श्री जगद्गुरू उदासीन आश्रम में किया शिव महापुराण कथा का शुभारंभ
कथा प्रवचन का श्रवण करने से प्रशस्त होता है कल्याण का मार्ग: स्वामी सुतिक्ष्ण मुनि

कलयुग दर्शन (24×7)
सागर कुमार (सह संपादक)
हरिद्वार। जस्साराम रोड़ स्थित श्री जगद्गुरू उदासीन आश्रम के 55वें वार्षिकोत्सव के उपलक्ष्य में श्री शिव महापुराण कथा का शुभारंभ किया गया। कथा के शुभारंभ से पूर्व बिरला घाट से आश्रम तक कलश यात्रा निकाली गई। कलश यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त शामिल हुए। कथा का शुभारंभ करते हुए महंत सुतिक्ष्ण मुनि ने कहा कि संतों के सानिध्य में कथा प्रवचन का श्रवण करने से कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने कहा कि गंगा तट पर संतों के सानिध्य में होने वाले धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेने का अवसर सौभाग्य से प्राप्त होता है और इसका कई गुणा पुण्य लाभ भक्तों को प्राप्त होता है। इसलिए इस अवसर को कभी गंवाना नहीं चाहिए। स्वयं कथा का श्रवण करने के साथ अन्य व्यक्तियों को भी इसके लिए प्रेरित करना चाहिए।

कथा व्यास पंडित लक्ष्मी नारायण शास्त्री ने शिव महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि देवों के महादेव शिव ही सृष्टि के प्रधान देव हैं। समस्त सृष्टि शिव से उत्पन्न होती है और शिव में ही समाहित हो जाती है। सूक्ष्म आराधना से ही प्रसन्न हो जाने वाले भगवान शिव भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। उन्होंने भक्तों को शिव महात्मय, पापी देवराज, बिन्दुग, चंचुला चरित्र की कथा का श्रवण कराया। मुख्य यजमान कान्ता दुग्गल, नितिन दुग्गल, तरूण तुग्गल, चीतेश दुग्गल ने सभी संतों का फूलमाला पहनाकर स्वागत किया और आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर स्वामी रविदेव शास्त्री, स्वामी हरिहरानंद, स्वामी दिनेश दास, स्वामी ज्योर्तिमयानंद, महंत सूरज दास, महंत बिहारी शरण सहित कई संत महंत मौजूद रहे।



