उत्तर प्रदेश

अवैध खनन के खिलाफ प्रशासन का ‘ऑपरेशन मिडनाइट’, एसडीएम सदर की छापेमारी में तीन वाहन सीज, माफियाओं में मचा हड़कंप

कलयुग दर्शन (24×7)

अबलीश कुमार (सहारनपुर संवाददाता)

सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में अवैध खनिज परिवहन और खनन के काले कारोबार पर नकेल कसने के लिए जिला प्रशासन ने अपना रुख और सख्त कर लिया है। खनन माफियाओं के मंसूबों को नाकाम करने के लिए देर रात एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया गया। सहारनपुर के जिलाधिकारी मनीष बंसल के स्पष्ट निर्देशों का पालन करते हुए, उपजिलाधिकारी (एसडीएम) सदर सुबोध कुमार ने राजस्व टीम के साथ मिलकर एक सघन छापेमारी अभियान चलाया। इस ‘ऑपरेशन मिडनाइट’ के दौरान, थाना चिलकाना क्षेत्र में अवैध रूप से खनिज सामग्री का परिवहन कर रहे तीन वाहनों को पकड़कर सीज कर दिया गया। प्रशासन की इस औचक और सख्त कार्रवाई से खनन माफियाओं के बीच हड़कंप की स्थिति बनी हुई है। यह कार्रवाई उन शिकायतों और सूचनाओं के बाद की गई, जिनमें पता चला था कि कुछ तत्व रात के अंधेरे का फायदा उठाकर अवैध खनन और उसके परिवहन को अंजाम दे रहे हैं। जिलाधिकारी मनीष बंसल ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम सदर सुबोध कुमार को अवैध खनन के इस नेटवर्क पर तत्काल और प्रभावी कार्रवाई करने का निर्देश दिया था देर रात की गई छापेमारी, माफियाओं को नहीं मिला संभलने का मौका जिलाधिकारी के निर्देश मिलते ही, एसडीएम सदर सुबोध कुमार ने एक विशेष रणनीति के तहत अपनी राजस्व टीम को संगठित किया। गोपनीयता बनाए रखते हुए, टीम ने देर रात्रि में थाना चिलकाना क्षेत्र के उन मार्गों पर जाल बिछाया, जिनके अवैध परिवहन के लिए कुख्यात होने की सूचना थी। देर रात जब सड़कों पर सन्नाटा पसरा था, तभी एसडीएम सुबोध कुमार ने अपनी टीम के साथ औचक चेकिंग शुरू की। इस दौरान, खनिज सामग्री से लदे कई वाहनों को रोका गया।

जाँच के दौरान तीन वाहन ऐसे पाए गए जो अवैध परिवहन के इस कृत्य में सीधे तौर पर संलिप्त थे।उपजिलाधिकारी सुबोध कुमार ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि पकड़े गए वाहनों में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। उन्होंने बताया कि एक वाहन पर “अवैध माईनिंग टैग” लगा हुआ था, जो संभवतः प्रशासन को धोखा देने या एक फर्जी पहचान प्रस्तुत करने का प्रयास था। इससे भी अधिक गंभीर बात यह थी कि पकड़े गए दो अन्य वाहन “बिना नम्बर प्लेट” के ही खनन सामग्री का परिवहन कर रहे थे। यह कानून का खुला उल्लंघन है और स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि इन वाहनों का संचालन पूरी तरह से अवैध तरीके से और अपनी पहचान छिपाने के इरादे से किया जा रहा था, ताकि पकड़े जाने पर उन्हें ट्रैक न किया जा सके। एसडीएम सुबोध कुमार ने तत्काल प्रभाव से इन तीनों वाहनों को जब्त करने का आदेश दिया। पकड़े गये तीनों वाहनों को अग्रिम कानूनी कार्रवाई के लिए थाना चिलकाना की सुपुर्दगी में देकर सीज करा दिया गया है। अब पुलिस इन वाहनों के मालिकों और इस अवैध परिवहन नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने में जुट गई है। यह पहली बार नहीं है जब एसडीएम सदर सुबोध कुमार ने खनन माफियाओं के खिलाफ इस तरह की कड़ी कार्रवाई की हो। उनके क्षेत्र में पदभार संभालने के बाद से ही वे अवैध खनन के खिलाफ लगातार सक्रिय रहे हैं। बताया जा रहा है कि इससे पूर्व भी कई अवसरों पर उपजिलाधिकारी सुबोध कुमार ने इसी तरह की औचक छापेमारी करते हुए अवैध खनन परिवहन में संलिप्त कई वाहनों तथा उनके चालकों को पकड़ा है। उनकी लगातार कार्रवाइयों ने अवैध खनन के कारोबार में लिप्त लोगों के बीच एक स्पष्ट संदेश भेज दिया है कि प्रशासन अब किसी भी कीमत पर बख्शने के मूड में नहीं है।

उपजिलाधिकारी सुबोध कुमार ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि प्रशासन केवल वाहनों को पकड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि इस पूरे गिरोह की कमर तोड़ने पर काम कर रहा है। उन्होंने अवगत कराया कि पूर्व में अवैध खनन के संबंध में ‘रैकी’ करने वाले व्यक्तियों के विरूद्ध भी अभियोग पंजीकृत कराये गये हैं। ये ‘रैकी’ करने वाले लोग माफियाओं के लिए मुखबिर का काम करते हैं और प्रशासनिक अधिकारियों या पुलिस की गतिविधियों पर नजर रखते हैं, ताकि अवैध वाहनों को सुरक्षित रूप से निकाला जा सके। इन पर कार्रवाई करके, प्रशासन ने माफिया के ‘इंटेलिजेंस नेटवर्क’ को ध्वस्त करने का प्रयास किया है। एसडीएम सुबोध कुमार ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यह कार्रवाई यहीं नहीं रुकेगी। उन्होंने कहा, “अवैध खनन परिवहन में संलिप्त पाये जाने वाले व्यक्तियों के विरूद्ध कठोरतम दण्डात्मक कार्यवाही की जायेगी। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अवैध खनिज परिवहन के विरूद्ध यह सघन अभियान भविष्य में भी इसी प्रकार जारी रहेगा। प्रशासन का लक्ष्य जिले में अवैध खनन को पूरी तरह से समाप्त करना है, जो न केवल सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुँचाता है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करता है। इस नवीनतम कार्रवाई ने एक बार फिर सहारनपुर प्रशासन की “जीरो टॉलरेंस” की नीति को रेखांकित किया है।

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