आस्थाउत्तराखंड

जापान और आस्ट्रेलिया से आए भक्तों ने ली स्वामी रामेश्वरानंद सरस्वती से दीक्षा

विश्व की सबसे प्राचीन संस्कृति है सनातन धर्म संस्कृति: स्वामी रामेश्वरानंद

कलयुग दर्शन (24×7)

सागर कुमार (सह संपादक)

हरिद्वार। जापान और आस्ट्रेलिया से आए सैकड़ों श्रद्धालु भक्तों ने सन्यास मार्ग कनखल स्थित रामेश्वर आश्रम पहुंचकर आश्रम के परमाध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी रामेश्वरानंद सरस्वती से दीक्षा प्राप्त की और आशीर्वाद लिया। श्रद्धालु भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करते हुए स्वामी रामेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि सनातन धर्म संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन संस्कृति है। पूरे संसार को अपना मानने वाली सनातन संस्कृति की विशेषतााओ से प्रभावित होकर पश्चिमी देशों के लोग भी इसे अपना रहे हैं। स्वामी रामेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि भगवान श्रीराम सनातन धर्म के आदर्श हैं।

भगवान श्रीराम के आदर्शो का अनुसरण करने वाले व्यक्ति को जीवन में कभी दुख और संकट का सामना नहीं करना पड़ता। श्रीराम की कृपा से जीवन सहज और सरल हो जाता है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में निर्मित हुआ भव्य श्रीराम मंदिर पूरे विश्व को आध्यात्मिकता के प्रकाश से आलोकित कर रहा है। श्रद्धालु भक्तों से आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि जापान और आस्ट्रेलिया में भगवान श्रीराम के आदर्शो का प्रचार प्रसार कर लोगों को प्रेरित करें। इस अवसर पर आस्ट्रेलिया स्थित रामेश्वर आश्रम के कोठारी चैतन्यानंद, स्वामी नरेशानंद, गौरव भारद्वाज, अमित वालिया सहित जापान व आस्ट्रेलिया से आए श्रद्धालु भक्त मौजूद रहे।

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