उत्तराखंड

सरस्वती पूजा से जीवन में विद्या, विवेक और संस्कारों का होता है विकास: कामेश्वर सिंह यादव

कलयुग दर्शन (24×7)

सागर कुमार (सह संपादक)

हरिद्वार। विद्या, बुद्धि, ज्ञान, संगीत एवं कला की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती की आराधना का पावन पर्व सरस्वती पूजा श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। यह पर्व विशेष रूप से बसंत पंचमी के दिन मनाया जाता है, जो ज्ञान और नवचेतना का प्रतीक माना जाता है। उक्त विचार पूर्वांचल उत्थान संस्था के तत्वावधान में आयोजित षष्ठ सरस्वती पूजनोत्सव एवं महायज्ञ अनुष्ठान के संदर्भ में सरस्वती पूजा आयोजन समिति के अध्यक्ष कामेश्वर सिंह यादव ने बैठक के दौरान व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि शुक्रवार, 23 जनवरी 2026 को श्री अवधूत मंडल आश्रम बाबा हीरादास हनुमान मंदिर में महामंडलेश्वर डॉ स्वामी संतोषानंद देव महाराज के सानिध्य में भव्य एवं दिव्य कार्यक्रम की रूप रेखा तैयार की जा रही है। सभी सदस्यों से कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सहयोग का आह्वान किया जा रहा है। कोई सदस्य छूट न जाएं, कोई हमसे रूठ न जाएं। इसका विशेष ध्यान रखा जा रहा है। इस मौके पर श्री अवधूत मंडल आश्रम बाबा हीरादास हनुमान मंदिर/आश्रम के पीठाधीश्वर महंत महामंडलेश्वर डॉ स्वामी संतोषानंद देव ने कहा कि माँ सरस्वती की कृपा से मानव जीवन से अज्ञान, अंधकार और जड़ता का नाश होता है तथा विवेक, सद्बुद्धि और संस्कारों का विकास होता है।

शास्त्रों में माँ सरस्वती को वाणी, बुद्धि और विद्या की देवी कहा गया है, जिनकी आराधना से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है। उन्होंने कहा कि सरस्वती पूजा का विशेष महत्व विद्यार्थियों, शिक्षकों, विद्वानों, कलाकारों, कवियों और संगीत साधकों के लिए है। इस दिन पुस्तकों, लेखन सामग्री एवं वाद्य यंत्रों की पूजा कर ज्ञान के प्रति सम्मान प्रकट किया जाता है। कई स्थानों पर बच्चों का विद्यारंभ संस्कार भी इसी शुभ दिन संपन्न कराया जाता है। कार्यक्रम संयोजक एवं वरिष्ठ समाजसेवी रंजीता झा ने कहा कि बसंत पंचमी के साथ ही बसंत ऋतु का आगमन माना जाता है। पीले रंग का विशेष महत्व है, जो उल्लास, ऊर्जा और समृद्धि का प्रतीक है। प्रकृति में चारों ओर नवजीवन और सौंदर्य का संचार इस पर्व को और अधिक मंगलमय बनाता है। अध्यक्ष सीए आशुतोष पाण्डेय ने कहा कहा कि सरस्वती पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज को शिक्षा, संस्कृति और नैतिक मूल्यों के संरक्षण का संदेश देने वाला पर्व है। यह पर्व हमें स्मरण कराता है कि ज्ञान ही मानव जीवन की सर्वोच्च शक्ति है। महासचिव बीएन राय ने कहा कि माँ सरस्वती से सभी के जीवन में विद्या, विवेक, शांति और सफलता प्रदान करने की कामना करते है। उन्होंने कहा कि विद्वान आचार्य भोगेंद्र झा एवं विनय मिश्रा के द्वारा पूजन कार्य संपन्न होगा। बैठक में काली प्रसाद साह, विष्णु देव साह, अबधेश झा, मनोज मिश्रा, संतोष कुमार, इंद्रजीत साह, अर्चना झा सहित अन्य लोग मौजूद रहें।

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