तुलसी मानस मंदिर परिसर में दी गयी ब्रह्मलीन स्वामी अर्जुन पुरी को समाधि, संत समाज और श्रद्धालु भक्त रहे मौजूद
संत समाज के प्रेरणास्रोत थे ब्रह्मलीन स्वामी अर्जुन पुरी: स्वामी कैलाशानंद गिरी

कलयुग दर्शन (24×7)
विजय कुमार (ब्यूरो चीफ)
हरिद्वार। भूपतवाला स्थित तुलसी मानस मंदिर के परमाध्यक्ष एवं जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर ब्रह्मलीन स्वामी अर्जुनपुरी महाराज को सोमवार को मंदिर परिसर में समाधि दी गयी। इस दौरान सभी तेरह अखाड़ों के संत महापुरूष और श्रद्धालु भक्त मौजूद रहे। समाधि से पूर्व ब्रह्मलीन अर्जुनपुरी महाराज की अंतिम यात्रा निकाली गयी। स्वामी अर्जुनपुरी का रविवार को निधन हो गया था। ब्रह्मलीन स्वामी अर्जुन पुरी महाराज को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने कहा कि परमार्थ के लिए जीवन समर्पित करने वाले ब्रह्मलीन स्वामी अर्जुन पुरी महाराज संत समाज के प्रेरणास्रोत थे। सभी को उनके दिखाए मार्ग पर चलते हुए मानव कल्याण में योगदान करना चाहिए। अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरी महाराज ने कहा कि संत केवल देह त्याग करते हैं। उनके विचार सदैव समाज का मार्गदर्शन करते हैं। सनातन के प्रचार प्रसार और मानव कल्याण में ब्रह्मलीन स्वामी अर्जुन पुरी महाराज का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।

जयराम पीठाधीश्वर स्वामी ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी अर्जुन पुरी महाराज का जीवन निर्मल जल के समान था। उनका निधन संत समाज के लिए बड़ा आधात है। जिसे कभी पूरा नहीं किया जाएगा। श्रीमहंत प्रेम गिरी, श्रीमहंत नारायण गिरी, स्वामी हरिचेतनानंद ने कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी अर्जुन पुरी महाराज संत समाज और भक्तों की स्मृतियों में सदैव जीवंत रहेंगे। सभी को उनके विचारों का अनुसरण करते हुए परमार्थ के लिए कार्य करना चाहिए। श्रीमहंत रामरतन गिरी महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी अर्जुन पुरी त्याग और तपस्या की प्रतिमूर्ति थे। महंत जसविन्दर सिंह, महंत विष्णुदास, स्वामी रामेश्वरानंद सरस्वती, स्वामी ललितानंद गिरी, सांसद सतपाल ब्रह्मचारी, स्वामी अनंतानंद, स्वामी ऋषिश्वरानंद, बाबा हठयोगी, महंत प्रताप पुरी, महंत गोविंददास, स्वामी शिवानन्द भारती, स्वामी ऋषि रामकृष्ण, महंत कौशलपुरी, स्वामी हरिवल्लभ दास शास्त्री, महंत महेश पुरी, स्वामी शिवानंद भारती, स्वामी शिवम महंत, स्वामी निर्मल दास, स्वामी रविदेव शास्त्री, महंत राघवेंद्र दास, स्वामी अवंतिकानंद ब्रह्मचारी, भक्त दुर्गादास सहित बड़ी संख्या में संत महापुरूष और श्रद्धालु भक्त मौजूद रहे।
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