बजट किसान-मज़दूर और ग्रामीण भारत की अपेक्षाओं पर खरा नहीं: आरिफ मलिक

कलयुग दर्शन (24×7)
अबलीश कुमार (सहारनपुर संवाददाता)
सहारनपुर। भारतीय किसान यूनियन टिकैत के मण्डल महासचिव आरिफ मलिक ने कहा कि प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2026-27 देश के किसान, मज़दूर, आदिवासी समाज और ग्रामीण भारत की मूल समस्याओं का समाधान करने में असफल रहा है। बढ़ती महंगाई, खेती की लागत में लगातार इज़ाफा, कर्ज़ के बोझ और गिरती आय से जूझ रहे किसानों के लिए बजट में न तो कर्ज़माफी पर कोई ठोस पहल की गई और न ही न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी गारंटी देने का प्रावधान किया गया। मण्डल महासचिव आरिफ मलिक ने आगे कहा कि ग्रामीण रोज़गार और बेरोज़गारी के सवाल पर भी बजट निराशाजनक है। रोज़गार योजनाओं को मज़बूत करने, न्यूनतम मज़दूरी बढ़ाने और मज़दूरों की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बजट में कोई स्पष्ट दिशा नहीं दिखाई देती। इससे ग्रामीण युवाओं में बढ़ती बेरोज़गारी की समस्या और गहरी होने की आशंका है, आदिवासी समाज के जल-जंगल-ज़मीन, शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका जैसे बुनियादी मुद्दों को बजट में अपेक्षित प्राथमिकता नहीं दी गई।

मण्डल महासचिव आरिफ मलिक ने आगे मीडिया से बताया कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के बजाय बजट का झुकाव एक बार फिर शहरी और कॉरपोरेट हितों की ओर दिखाई देता है। कुल मिलाकर यह बजट ज़मीनी सच्चाइयों से दूर, आंकड़ों और घोषणाओं का बजट है, जिसमें देश के अन्नदाता और मेहनतकश वर्ग की अपेक्षाओं की अनदेखी की गई है। सरकार को चाहिए कि वह किसान, मज़दूर, आदिवासी और ग्रामीण भारत को केंद्र में रखकर अपनी नीतियों और बजटीय प्रावधानों पर पुनर्विचार करे।
काग़ज़ों में सजा बजट, भाषणों में विकास रहा,
पर खेत का किसान, हाथ का मज़दूर फिर उदास रहा।
आदिवासी के जंगल सूने, गाँव की गलियाँ खाली रहीं,
शहर चमकता रहा मगर ग्रामीण भारत प्यासा रहा।
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