उत्तर प्रदेश

नगर निगम सहारनपुर में ई-टेंडर प्रक्रिया पर सवाल, कुछ फर्मों को लाभ पहुँचाने की आशंका

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अबलीश कुमार (सहारनपुर संवाददाता)

सहारनपुर। नगर निगम सहारनपुर के निर्माण विभाग में प्रस्तावित ई-टेंडर प्रक्रिया को लेकर विभागीय हलकों में गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों के अनुसार कुछ ठेकेदार फर्मों द्वारा आपसी समन्वय के माध्यम से बोली प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास किया जा सकता है, जिससे निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। सूत्रों का कहना है कि कुछ ठेकेदारों द्वारा अलग-अलग फर्मों के नाम से एक ही स्थान पर बैठकर टेंडर बोली तैयार कराई जा रही है। यदि बोली प्रक्रिया में किसी एक व्यक्ति द्वारा एक से अधिक फर्मों के डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (डीएससी) का उपयोग किया जाता है, तो यह ई-टेंडर नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा। बताया जा रहा है कि आगामी टेंडरों में कुछ चुनिंदा फर्मों को अधिक संख्या में कार्य मिलने की संभावना पर भी विभाग के भीतर चर्चा चल रही है। हालांकि नियमों के अनुसार कोई भी फर्म यदि पात्रता शर्तों को पूरा करती है और सबसे कम दर पर बोली प्रस्तुत करती है, तो उसे कार्य दिया जाना प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन यदि टेंडर की शर्तें किसी विशेष फर्म के अनुरूप तैयार की जाती हैं, तो इसे अनियमितता की श्रेणी में रखा जाता है। वित्तीय दृष्टि से भी टेंडरों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार इस बार कई कार्यों के टेंडर अनुमानित लागत (एस्टीमेट रेट) के आसपास ही स्वीकृत होने की संभावना जताई जा रही है। विभागीय जानकारों का कहना है कि केवल एस्टीमेट रेट पर टेंडर स्वीकृत होना अपने-आप में नियम विरुद्ध नहीं है, लेकिन यदि सभी फर्मों द्वारा समान या लगभग समान दरों पर बोली लगाई जाती है, तो इसकी जांच आवश्यक हो जाती है। इसी बीच टेंडर की प्रस्तावित तिथि को आगे बढ़ाने को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। पहले 23 फरवरी 2026 को निर्धारित बताई जा रही तिथि में संशोधन की तैयारी की बात कही जा रही है। नियमों के अनुसार संशोधित तिथि जारी करना सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन बार-बार बदलाव होने की स्थिति में इसकी वजहों को सार्वजनिक किया जाना आवश्यक माना जाता है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि यदि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाती है और ई-टेंडर से संबंधित सभी दस्तावेज, पात्रता शर्तें तथा तुलनात्मक दर सूची (कम्पेरेटिव स्टेटमेंट) सार्वजनिक की जाती है, तो स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकती है। अब निगाहें प्रशासन और उच्च अधिकारियों पर टिकी हैं कि क्या सहारनपुर में निर्माण विभाग के इन टेंडरों की प्रक्रिया की पारदर्शी जांच कराई जाएगी या फिर मामला केवल चर्चाओं तक ही सीमित रह जाएगा।

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