धर्म और परंपरांओं के बीच बन रही टकराव की स्थिति पर विचार करे संत समाज: स्वामी प्रबोधानंद गिरी

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हिमांशु (संवाददाता)
हरिद्वार। महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद गिरि महाराज ने कहा कि देश में धर्म और परम्पराओं को लेकर टकराव की स्थिति बन रही है। संत समाज को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। फर्जी शंकराचार्यों की बाढ़ आ गयी है। स्वामी प्रबोधानंद गिरी ने आरोप लगाया कि जूना अखाड़ा फर्जी जगद्गुरु शंकराचार्य बना रहा है। अखाड़ों को किसी व्यक्ति को शंकराचार्य बनाने का अधिकार नहीं है। इसके बावजूद अखाड़ा परिषद द्वारा फर्जी कहकर निकाले गए व्यक्ति को धन बल के प्रभाव से जगद्गुरु शंकराचार्य बना दिया गया और प्रमोद कृष्णम को जगद्गुरु बना दिया। इस पर सवाल उठाने पर विश्वविद्यालयों की मानद उपाधि की तरह शंकराचार्य की मानद उपाधि दिए जाने का कुतर्क दिया जा रहा है। अखाड़ों का गठन सनातन को बचाने के लिए हुआ था। लेकिन वर्तमान में अखाड़ों के पदाधिकारी ऐश कर रहे हैं।

सरकारों और नेताओं की चापलूसी करने के साथ नेताओं को स्नान करा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि उनका मूंह ना खुलवाएं। अखाड़ों में क्या हो होता है। यह सबको पता है। उन्होंने फर्जी नागा बनाने का आरोप भी लगाया। स्वामी प्रबोधानंद गिरि ने जूना अखाड़े के नेतृत्व से अपील करते हुए कहा कि अखाड़ों की प्रतिष्ठा और परम्पराओं को बनाए रखने के लिए विवादों से बचना आवश्यक है। उन्होंने आश्रमों से जुड़े विवादों और कथित तौर पर फर्जी नागा साधु बनाए जाने जैसे मामलों की निष्पक्ष जांच की भी मांग की। उन्होंने संत समाज से भी आग्रह किया कि सनातन धर्म की गरिमा बनाए रखने के लिए पारदर्शिता और अनुशासन का पालन किया जाए, ताकि समाज में संतों की विश्वसनीयता बनी रहे।



