धूमधाम से मनाया गया श्री जगद्गुरू उदासीन आश्रम का वार्षिकोत्सव
आश्रम की सेवा परंपरा का विस्तार करना ही जीवन का उद्देश्य: स्वामी सुतिक्ष्ण मुनि

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राकेश वालिया (संवाददाता)
हरिद्वार। जस्साराम रोड़ स्थित श्री जगद्गुरू उदासीन आश्रम का 55 वां वार्षिकोत्सव संतों और श्रद्धालुओं की उपस्थिति में धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर संत सम्मेलन का आयोजन किया गया। आश्रम के परमाध्यक्ष स्वामी सुतिक्ष्ण मुनि के संयोजन एवं महामंडलेश्वर स्वामी भगवतस्वरूप महाराज की अध्यक्षता में आयोजित संत सम्मेलन में संत समाज ने ब्रह्मलीन स्वामी सत्यनाम दास महाराज, ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर प्रियतम मुनि महाराज एवं ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर स्वामी कृष्णानंद महाराज को श्रद्धांजलि दी और सनातन परंपरा के प्रचार प्रसार और युवा पीढ़ी को धर्म से जोड़ने का आह्वान किया। भारत माता मंदिर के महंत महामंडलेश्वर स्वामी ललितानंद गिरी महाराज ने कहा कि त्याग, तपस्या और सेवा की प्रतिमूर्ति ब्रह्मलीन स्वामी सत्यनाम दास महाराज, ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर प्रियतम मुनि महाराज एवं ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर स्वामी कृष्णानंद महाराज का सनातन के संरक्षण संवर्द्धन में योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। उन्होंने कहा कि युवा युवा पीढ़ी को प्राचीन ऋषि परंपरा से प्रेरणा लेनी चाहिए। महामंडलेश्वर स्वामी भगवत स्वरूप महाराज ने कहा कि अपने गुरूजनों से मिले संस्कार और शिक्षाओं का अनुसरण करते हुए स्वामी सुतिक्ष्ण मुनि धर्म और अध्यात्म के प्रचार प्रसार के साथ मानव सेवा में भी महत्वपूर्ण योगदान कर रहे हैं।

युवा संतों को उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। सभी संतजनों का आभार व्यक्त करते हुए स्वामी सुतिक्ष्ण मुनि ने कहा कि व सौभाग्यशाली हैं कि उन्हें गुरू के रूप में उच्चकोटि के संतों का सानिध्य प्राप्त हुआ। गुरूजनों से प्राप्त ज्ञान और शिक्षाओं का अनुसरण करते हुए आश्रम की सेवा परंपरा का विस्तार करना ही उनके जीवन का उद्देश्य है। स्वामी रविदेव शास्त्री एवं स्वामी निर्मलदास ने कहा कि गुरूजनों के प्रति निष्ठा और विश्वास ही जीवन में प्रगति का मूलमंत्र है। उन्होंने कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी सत्यनाम दास महाराज, ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर प्रियतम मुनि महाराज एवं ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर स्वामी कृष्णानंद महाराज विलक्षण संत थे। स्वामी हरिहरानंद, स्वामी दिनेश दास, कान्ता दुग्गल, नितिन दुग्गल, तरूण तुग्गल, चीतेश दुग्गल, महेंद्र सेठी ने सभी संत महापुरूषों का फूलमाला पहनाकर स्वागत किया। कार्यक्रम में स्वामी अनंतानंद गिरी, स्वामी रामानुज सरस्वती, स्वामी विवेकानंद, महंत रूपेंद्र प्रकाश, महंत दामोदर दास, स्वामी राम मुनि, महंत सूर्यांश मुनि, महंत मोहन सिंह, विष्णुदत्त राकेश, महंत मुरलीदास, महंत सूरजदास, महंत जमनादास, महंत श्यामदास, महंत विनोद महाराज, स्वामी कृष्णानंद, स्वामी शिवम महंत, कथाव्यास पंडित लक्ष्मी नारायण शास्त्री सहित बड़ी संख्या में संत एवं श्रद्धालु मौजूद रहे।



