बाबा हठयोगी ने दिया वैष्णव अखाड़ा परिषद और दिगम्बर अखाड़े के प्रतिनिधि पद से इस्तीफा
संत मान रहे अखाड़ा परिषद कार्यकारिणी में उपेक्षा को इस्तीफे का कारण

कलयुग दर्शन (24×7)
राकेश वालिया (संवाददाता)
हरिद्वार। बैरागी संपद्राय के प्रमुख संत बाबा हठयोगी ने अखिल भारतीय वैष्णव अखाड़ा परिषद और दिगम्बर अखाड़े के प्रतिनिधि पद से इस्तीफा दे दिया है। हाल ही में घोषित अखाड़ा परिषद की कार्यकारिणी में हरिद्वार और ऋषिकेश के बैरागी संप्रदाय की संतों की अनदेखी को उनके इस्तीफे की वजह बताया जा रहा है। बाबा हठयोगी के इस्तीफे के बाद बैरागी संतों में हलचल तेज हो गयी है। नाम नहीं छापने की शर्त पर कुछ बैरागी संतों महंतों ने बताया कि हाल ही में हुए अखाड़ा परिषद के चुनाव में हरिद्वार और ऋषिकेश के संतों की पूरी तरह अनदेखी की गयी है। उत्तराखंड के संतों के बजाए बाहरी संतों को प्रवक्ता और मीडिया प्रभारी बनाया गया है। संतों का कहना है कि तीन साल बाद हुए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के चुनाव को लेकर तय हुआ था कि परिषद का अध्यक्ष बैेरागी अखाड़ों से और महामंत्री सन्यासी अखाड़ों से होगा। लेकिन ठीक उलट हुआ और अध्यक्ष सन्यासी अखाड़े को सौंप दिया गया। संतों का यह भी कहना है कि बाबा हठयोगी श्रीमहंत ज्ञानदास महाराज की अध्यक्षता वाली अखाड़ा परिषद में राष्ट्रीय प्रवक्ता पद का दायित्व कुशलतापूर्वक संभाल चुके हैं।

प्रयागराज महाकुंभ में बैठक के दौरान हुई मारपीट के बाद श्रीमहंत राजेंद्रदास महाराज के नेतृत्व में गठित वैष्णों अखाड़ा परिषद में बाबा हठयोगी को महामंत्री पद की जिम्मेदारी दी गयी थी। संतों का कहना है कि बैठकों में दिगम्बर अखाड़े का प्रतिनिधित्व बाबा हठयोगी ही करते थे। लेकिन अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की कार्यकारिणी में बाबा हठयोगी सहित उत्तराखंड के बैरागी संतों महंतों की पूरी तरह उपेक्षा की गयी है। उपेक्षा के चलते ही बाबा हठयोगी इस्तीफा देने के लिए मजबूर हुए हैं। संतों का यह भी कहना है कि क्या बैरागी संतों में कोई अखाड़ा परिषद अध्यक्ष बनने के योग्य नहीं है। प्रवक्ता और मीडिया प्रभारी जैसे पद भी ऐसे संतों को सौंप दिए गए, जिन्हें अखाड़ा परिषद की एबीसी तक पता नहीं है। दूसरी और बाबा हठयोगी का कहना है कि त्यागपत्र देने के बाद वे अब सभी जिम्मेदारियों से मुक्त हो गए हैं। बैेरागी संप्रदाय के साथ अन्य संतों में भी बाबा हठयोगी के इस्तीफे को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। संतों का कहना है कि प्रत्येक मामले में मुखर रहने वाले बाबा हठयोगी का इस्तीफा नेतृत्व को लेकर दो गुटों में बंटी अखाड़ा परिषद में कोई नया गुल खिला सकता है।



