वरिष्ठ संतों को अखाड़े से आजीवन निष्कासित करने का किसी को कोई अधिकार नहीं: महंत रघुमुनि

कलयुग दर्शन (24×7)
राकेश वालिया (संवाददाता)
हरिद्वार। श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन के पूर्व मुखिया महंत रघमुनि ने अखाड़े से पांच सतों के आजीवन निष्कासन को गलत बताते हुए कहा है कि यह हिटलरशाही है और वरिष्ठ संतों को अखाड़े से आजीवन निष्कासित करने का किसी को कोई अधिकार नहीं है। इस फैसले के खिलाफ वे हाईकोर्ट जाएंगे और तथाकथित महंतों को सबक सिखाएंगे। महंत दुर्गादास, महंत महेश्वरदास एवं महंत अद्वैतानंद पर आरोप लगाते हुए महंत रधुमुनि ने कहा कि अखाड़े के नियमों के खिलाफ उन्हें एवं चार अन्य मुकामी महंतों को जबरन अखाड़े से निष्कासित किया गया है। महंत रघुमुनि ने कहा कि उत्तर पंगत के महंत की घोषणा पंजाब, हरिद्वार या प्रयागराज मुख्यालय में करने के बजाए कांचीपुरम में की गयी। कांचीपुरम में आयोजित महंताई कार्यक्रम में शामिल नहीं होने की वजह से कोठारी शिवानंद, कोठारी जयेंद्र मुनि, एवं मुकामी महंत सेवा दास को निष्कासित किया गया था। पंजाब, उत्तर प्रदेश एवं उत्तरांचल सहित देश के सभी मंडलों के महंतों द्वारा महंत दुर्गादास, महंत महेश्वरदास एवं महंत अद्वैतानंद का बहिष्कार किए जाने की वजह से निष्कासन की कार्यवाही उत्तर प्रदेश या पंजाब में संभव नहीं थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांचीपुरम में अवैध कार्यकारिणी द्वारा एक असामाजिक तत्व को महामंडलेश्वर बनाकर जबरन पश्चिम पंगत के आश्रम को कब्जाया गया है। उसके सानिध्य में यह लोग अपने आप को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। इसीलिए उन्होंने कांचीपुरम को चुना, क्योंकि वह जानते थे कि उत्तर प्रदेश में चुनाव करना संभव नहीं था। महंत रघुमुनि ने कहा कि अधिकतर मुकामी महंत एवं महंत इस कार्यक्रम के विरोध में है और जानते हैं कि यह चुनाव अवैध है। दुर्गादास पहले से ही कांचीपुरम के कार्यक्रम में नहीं पहुंचने वाले मुकामी महतों, महंतों और कोठारी को देख लेने की धमकी दे रहे थे। निकालने की धमकी के साथ ही मारने पीटने की धमकी दी गई और कई लोगों के साथ मारपीट की भी गई। लेकिन दबंगई और गुंडागर्दी के कारण कोई बोल नहीं पा रहा है।

महंत रघुमुनि ने कहा कि प्रयागराज में संतों महंतों को गुमराह करके रामनवमी दास को फर्जी तरीके से मुखिया महंत बनाया गया था। उन्हें आज तक महंत का कोई अधिकार प्राप्त नहीं हुआ है, क्योंकि उनकी महंती न्यायालय के आदेश के खिलाफ है। अखाड़े के किसी भी बैंक खाते में में इनका नाम नहीं चढ़ा है। यही हाल सत् मुनि का होना है। इन्हें भी महंत का कोई अधिकार प्राप्त नहीं होगा। क्योंकि इन दोनों की महंती उच्च न्यायालय की अवमानना के दायरे में आती है। जिन्होंने महंती की है वह जेल जाएंगे तथा यह दोनों महंत अखाड़े से निकाले जाएंगे, यह अटल सत्य है। महंत रधुमुनि ने कहा कि पंजाब के लोगों के साथ बहुत बड़ा धोखा किया गया है। पूरब पंगत के मुखिया महंत संतोष मुनि की हत्या के पश्चात पूरब पंगत का महंत पंजाब से नहीं बनाया गया। दुर्गा दास ने ही पंजाब से मुखिया महंत ना बनाने का दबाव महेश्वर दास पर डाला था। जबकि संतोष मुनि के स्थान पर पंजाब से ही कोई मुखिया महंत चुना जाना चाहिए था। जब उन्होंने इस बात को उठाया तो उन पर दबाव बनाने के लिए गुरुशरणानंद के शिष्य को आगे लाया गया। जो किसी योग्य नहीं था, दर्शनीय भी नहीं था। महंत रघुमुनि ने आरोप लगाया कि दुर्गा दास को केवल अपनी राजनीति की जमीन तैयार करनी थी, जिसमें वह कामयाब हो गए। जबकि दर्शनीय मूर्ति को ही मुखिया महंत बनाने की परंपरा है। महंत रघुमुनि ने आरोप लगाया कि महंत दुर्गादास केवल लड़वाने का काम करते हैं। पहले उन्होंने पश्चिम पंगत को तोड़ा। इसके बाद उत्तर पंगत को तोड़ने के साथ वह पंजाब, उत्तर प्रदेश और बिहार के साधुओं के बीच भी झगड़े पैदा कर रहे हैं। महंत रघुमुनि ने कहा कि महंत दुर्गादास अखाड़े के लिए खतरनाक व्यक्ति और अखाड़ा माफिया हैं। उनकी जल्द गिरफ्तारी ही अखाड़े के हित में है।



