उत्तराखंड

गणेशोत्सव की तैयारियां शुरू, पर्यावरण संरक्षण के प्रति बढ़ी जागरूकता

मिट्टी की गणेश प्रतिमाओं की मांग बढ़ी

कलयुग दर्शन (24×7)

आशु (संवाददाता)

हरिद्वार। सोमवार 14 सितम्बर से शुरू होने वाले दस दिवसीय गणेशोत्सव को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। गणेशोत्सव के चलते बाजारों में भी रौनक बढ़ने लगी है। श्रद्धालु भगवान गणेश की प्रतिमाएं खरीदने के लिए बाजारों का रुख कर रहे हैं। ग्राहकों की पसंद के अनुरूप विभिन्न आकार, स्वरूप और डिजाइन की गणेश प्रतिमाएं बाजार में उपलब्ध हैं। पर्यावरण संरक्षण के प्रति बढ़ती जागरूकता का असर भी लोगों की पसंद पर दिखाई दे रहा है। अधिकांश श्रद्धालु मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं। भूपतवाला स्थित परेडा मूर्ति कला केंद्र में विशेष रूप से मिट्टी की गणेश प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं। यहां 500 रुपये से लेकर 50 हजार रुपये तक की प्रतिमाएं उपलब्ध हैं। प्रतिमाओं को आकर्षक और जीवंत स्वरूप देने के लिए कारीगर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं।

गणेशोत्सव के बाद प्रतिमाओं के गंगा अथवा अन्य पवित्र नदियों में विसर्जन को लेकर हर वर्ष सवाल उठते रहे हैं। नारायणी शिला मंदिर के मुख्य पुजारी एवं ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज त्रिपाठी ने कहा कि पवित्र नदियों में प्रतिमा विसर्जन करना अनिष्टकारी होता है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में मूर्ति विसर्जन की परंपरा है, लेकिन उत्तर भारत में ऐसा नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तर भारत भगवान गणेश की जन्मस्थली है। यहां भगवान गणेश की प्रतिमा को विसर्जित करने के बजाय घर में स्थापित कर वर्षभर पूजन किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, भगवान गणेश की प्रतिमा का विसर्जन करने से उनके साथ रिद्धि-सिद्धि तथा शुभ-लाभ का भी विसर्जन माना जाता है।

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