उत्तर प्रदेश

मेघनाथ शक्ति प्रहार, लक्ष्मण मूर्छित, राम का विलाप देख भावुक हुए दर्शक

कलयुग दर्शन (24×7)

हैदर अंसारी (सहारनपुर जिला प्रभारी)

सहारनपुर। गोपाल नगर, नुमाईश कैम्प में सुपर क्लब (रजि०) के तत्वावधान में आयोजित 33वें रामलीला एवं दशहरा महोत्सव में मेघनाथ-लक्ष्मण युद्ध, शक्ति प्रहार तथा संजीवनी बूटी प्रसंग का भावपूर्ण मंचन किया गया। लीला के शुरू मे रावण द्वारा भोलेनाथ भगवान शिव की अराधना से किया गया। युद्ध की भीषणता, लक्ष्मण जी की मूर्छा और श्रीराम के करुण विलाप ने दर्शकों को भावुक कर दिया। लीला में लंकापति रावण के पुत्र मेघनाथ ने युद्धभूमि में अपने मायावी पराक्रम का प्रदर्शन करते हुए लक्ष्मण जी पर अमोघ शक्ति का प्रहार किया। शक्ति लगते ही लक्ष्मण जी मूर्छित होकर रणभूमि में गिर पड़े। अपने प्रिय अनुज को अचेत देखकर प्रभु श्रीराम व्याकुल हो उठे। उनका विलाप और लक्ष्मण के प्रति अगाध स्नेह देखकर दर्शकों की आंखें नम हो गईं। युद्धभूमि में छाई निराशा के बीच वानर सेना भी चिंतित दिखाई दी। इस संकट की घड़ी में विभीषण ने सुषेण वैद्य को लंका से लाने का सुझाव दिया। हनुमान जी सुषेण वैद्य को लेकर पहुंचे। वैद्य ने लक्ष्मण जी के प्राण बचाने के लिए संजीवनी बूटी लाने की आवश्यकता बताई। इसके बाद पवनपुत्र हनुमान जी संजीवनी की खोज में पर्वत की ओर चल पड़े। समय कम होने पर वे औषधियों की पहचान न कर पाने के कारण पूरा पर्वत ही उठा लाए। संजीवनी के प्रभाव से लक्ष्मण जी को चेतना लौटी तो श्रीराम सहित समस्त वानर सेना ने राहत की सांस ली और युद्धभूमि में उत्साह का संचार हो गया। मेघनाथ के रूप में क्लब अध्यक्ष राकेश सूरी कलाकार ने युद्ध के अहंकार और पराक्रम को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया, वहीं लक्ष्मण के रूप मे अक्षय सूरी श्रीराम के रूप मे कुशाग्र नैब, हनुमान जी के रूप मे अनुभव कत्याल ने अपने उत्कृष्ट अभिनय से दर्शकों पर अमित छाप छोडी।

सुषेण वैद्य की भूमिका मे जंग बहादुर जंगी, ने प्रसंग को जीवंत बना दिया। युद्ध मे संवाद, अभिनय और युद्ध के दृश्यों ने दर्शकों को रामकथा के इस मार्मिक प्रसंग से जोड़ दिया। भक्त शिरोमणि हनुमान जो को संजीवनी लेते हुए जाने पर उनका समय बर्बाद करने के लिये बहरूपिये के रूप मे आये कालनेमी की भूमिका मे प्रिंस कालड़ा ने अपनी काला प्रतिभा से दर्शकों को तालिया बजाने को मजबूर किया। मुख्य अतिथि के रूप मे आये नगर विधायक राजीव गुम्बर ने अयोध्या मे बने प्रभु श्री राम. मंदिर के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रभु राम मंदिर के लिये 500 वर्ष का संघर्ष और अनेको बलिदान हुए। श्री गुम्बार्का क्लब की ओर से अभिनंदन एवं स्वागत भी किया गया। रामलीला के कलाकारों ने अपने अभिनय से यह संदेश दिया कि संकट कितना ही बड़ा क्यों न हो, साहस, सेवा, त्याग और विश्वास के बल पर विजय का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है। शंकर सौदाई के सशक्त निर्देशन मे सजी रामलीला का सशक्त संचालन क्लब महामंत्री अनिल रसवंत ने किया, विभीषण के रूप मे अमन कालड़ा अंगद के रूप मे वंश नारंग नल के रूप मे शौर्य बजाज नील के रूप मे पार्थ कालड़ा के रूप मे भी खूब जमे। जबकि वैध के रूप मेहस्य कलाकार जंग बहादुर जंगी ने खूब हंसाया। कलाक़ारो की रूप सज्जा विजय एवं संदीप ने की तथा परिधान का दायित्व विक्की आहूजा ने निर्वहन किया।

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