15 फरवरी को महाशिवरात्रि पर्व मनाना शास्त्र सम्मत: स्वामी रामभजन वन
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दीपक झा (संवाददाता)
हरिद्वार, डरबन। शिव शक्ति मेडिसिन सेंटर के संस्थापक स्वामी रामभजन वन महाराजने कहा कि इस साल 2026 में महाशिवरात्रि 15 फरवरी, रविवार को मनाई जाएगी। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि इस बार 15 फरवरी शाम 5 बजकर 5 मिनट बजे से शुरू होकर 16 फरवरी शाम 5 बजकर 35 मिनट तक रहेगी। चूंकि, निशीथकाल (मध्य रात्रि) में चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी की रात को ही रहेगी, इसलिए इसी दिन महाशिवरात्रि मनाना शास्त्रसम्मत है। श्री तपोनिधि पंचायती अखाड़ा निरंजनी के अंतराष्ट्रीय संत स्वामी रामभजन वन महाराज ने शिवरात्रि पर्व का महत्व बताते हुए कहा कि सनातन धर्म में महाशिवरात्रि का विशेष महत्व है। देवों के देव महादेव की पूजा के लिए महाशिवरात्रि का दिन खास माना जाता है। इस दिन मंदिरों में शिव भक्तों का तांता लग जाता है। लोग शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं। इस दिन भक्तजन रात में भगवान शिव और माता पार्वती का जागरण करते हैं और उनका ध्यान करते हैं। माना जाता है कि शिवरात्रि के दिन महादेव का प्राकट्य हुआ था।

महाशिवरात्रि इस बार बहुत ही विशेष मानी जा रही है। दरअसल इस दिन शिव योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, प्रीति योग, आयुष्मान योग, सौभाग्य योग, शोभन योग, साध्य योग, शुक्ल योग, ध्रुव योग, व्यतिपात और वरियान योग का भी प्रभाव बना रहेगा। इस बार महाशिवरात्रि पर भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए दिनभर कई शुभ मुहूर्त मिलेंगे, जिनमें भक्त पूजा-अर्चना कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि पहला मुहूर्त सुबह 8 बजकर 24 मिनट से शुरू होकर 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। इसके बाद दूसरा मुहूर्त सुबह 9 बजकर 48 मिनट से 11 बजकर 11 मिनट तक का रहेगा. तीसरा मुहूर्त अमृत सर्वोत्तम मुहूर्त रहेगा, जो सुबह 11 बजकर 11 मिनट से 12 बजकर 35 मिनट तक का रहेगा, जिसमें जल चढ़ाना अत्यंत फलदायी रहेगा। जो श्रद्धालु शाम को पूजा करना चाहते हैं, वे 6 बजकर 11 मिनट से 7 बजकर 47 मिनट के बीच अभिषेक कर सकते हैं। इन सभी मुहूर्तों में श्रद्धा और सच्चे मन से शिवलिंग पर जल अर्पित करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।



