
कलयुग दर्शन (24×7)
दीपक झा (संवाददाता)
हरिद्वार। हरिद्वार अर्द्धकुंभ को दिव्य व भव्य बनाने की मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मेहनत रंग लाई, जिसके चलते अमृत और पर्व स्नानों की तिथियों की घोषणा हो गई। अर्द्ध कुंभ दिव्य और भव्य हो हम सदैव से इसके पक्षधर रहे हैं, किन्तु परम्पराओं का उल्लंघन किया जाना गलत है। बाबा बलराम दास हठयोगी ने कहा कि परम्पराओं का उल्लंघन किया जाना गलत है। आज तक के इतिहास में कुंभ, अर्द्ध कुंभ पर्व को लेकर अखाड़ों के प्रतिनिधियों के साथ मुख्यमंत्री की बैठक में किसी भी अन्य नेता ने शिरकत नहीं की, किन्तु यहां बैठक में विधायक तक मौजूद रहे। बाबा हठयोगी ने कहाकि जिस प्रकार से बैठक में आने के बाद श्री शंभू दशनाम आवाह्न अखाड़े के श्रीमहंत गोपाल गिरि महाराज और थानापति सत्यानारायण गिरि महाराज को बैठक से निकाला गया, वह सर्वथा गलत है। उन्होंने कहा कि संतों के बीच मतभेद हो सकते हैं, किन्तु यहां मनभेद देखने को मिला।

ऐसे में 13 अखाड़ों के प्रतिनिधियों की बैठक होने का राग नहीं अलापना चाहिए। सत्यता यह है कि बैठक में 12 अखाड़ों के प्रतिनिधि शामिल रहे। आवाह्न अखाड़े के संतों के साथ जो कुछ हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जब चार शाही स्नानों की घोषणा हो गई है, तो इस बात को भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि क्या अखाड़ों में धर्मध्वजा चढ़ेंगी, पेशवाईयां निकलेंगी। यदि पेशवाईयां नहीं निकलेंगी तो फिर शाही स्नान का औचित्य क्या। बाबा हठयोगी ने कहा कि बैठक से पूर्व तक संतों के विचारों में भिन्नता सुनाई दे रही थी, किन्तु आज अचानक सभी के स्वर एक कैसे हो गए। इस परिवर्तन का कारण क्या है। कहीं कोई बड़ा लेनदेन तो नहीं हुआ। अचानक शरणागत होने की बात समझ से परे है। उन्होंने कहा कि अर्द्ध कुंभ का आयोजन दिव्य व भव्य होना चाहिए। इसके लिए सभी को मिलकर कार्य करना होगा, किन्तु परम्पराओं का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।
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