मां कुष्मांडा ने किया था सृष्टि का सर्जन: स्वामी कैलाशानंद गिरी

कलयुग दर्शन (24×7)
दीपक कुमार (संवाददाता)
हरिद्वार। चैत्र नवरात्र के अवसर पर श्री दक्षिण काली मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां श्री दक्षिण काली के दर्शन पूजन और निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी से आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए मंदिर पहुंच रहे हैं। श्रद्धालु भक्तों को आशीर्वचन प्रदान करते हुए स्वामी कैलाशानंद गिरी ने कहा कि नवरात्रि का चौथा दिन मां कूष्माण्डा की उपासना को समर्पित है। आदिशक्ति मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कुष्मांडा ने सृष्टि का सर्जन किया था। उन्होंने बताया कि जब चारों ओर घोर अंधकार व्याप्त था और सृष्टि का अस्तित्व नहीं था, तब माता कूष्माण्डा ने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की।

ब्रह्मांड की रचना करने के कारण उन्हें कूष्माण्डा कहा गया। स्वामी कैलाशानंद गिरी ने कहा कि सूर्य मंडल के भीतर निवास करने वाली मां कुष्मांडा भक्तों अभय का वरदान देती है। नवरात्रों में उनकी उपासना और आराधना से संतुलन और सृजन की प्रेरणा मिलती है। जिससे साधक के अंतःकरण में नवीन ऊर्जा, उत्साह, सकारात्मकता और आध्यात्मिक चेतना जागृत होती है। मां कुष्मांडा की कृपा से रोग और भय से मुक्ति मिलती है। परिवार में सुख समृद्धि का वास होता है। जिससे नवीन चेतना के साथ अपने लक्ष्य की और अग्रसर होने की प्रेरणा मिलती है।



