उत्तराखंड

ममता और करूणा की प्रतीक हैं मां स्कंदमाता: स्वामी कैलाशानंद गिरी

कलयुग दर्शन (24×7)

दीपक कुमार (संवाददाता)

हरिद्वार। निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने कहा कि नवरात्र का पांचवा दिन मां भगवती के पांचवे स्वरूप स्कंदमाता की आराधना और पूजन को समर्पित है। श्री दक्षिण काली मंदिर में नवरात्र साधना के दौरान श्रद्धालु भक्तों को संबोधित करते हुए स्वामी कैलाशानंद गिरी ने कहा कि मां स्कंदमाता ममता और करूणा की प्रतीक हैं। उनकी आराधना करने से जीवन में शांति, प्रेम और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

जो साधक पूर्ण श्रद्धा और भक्ति भाव से मां स्कंदमाता की आराधना करते हैं। उनके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। स्कंदमाता की कृपा से जीवन में संतुलन और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। स्कंदमाता की उपासना करने से उनके पुत्र कार्तिकेय की कृपा भी साधक को प्राप्त होती है। स्वामी कैलाशानंद गिरी ने कहा कि मां भगवती का प्रत्येक स्वरूप कल्याणकारी है। नवरात्रों में सभी को मां के नौ स्वरूपों की आराधना अवश्य करनी चाहिए।

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