उत्तराखंड

सेवानिवृत्त शिक्षकों ने साझा किए अनुभव, शिक्षा के मानवीय मूल्यों पर दिया जोर

कलयुग दर्शन (24×7)

सोहन लाल (संवाददाता)

हरिद्वार। “अनुभव से सीख, शिक्षा की अनकही-अनसुनी कहानियां” विषय पर अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के जिला केंद्र, कनखल में एक भावनात्मक एवं प्रेरणादायी संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें विभिन्न विद्यालयों से सेवानिवृत्त शिक्षक शामिल हुए और अपने वर्षों के अनुभव, संघर्ष, उपलब्धियां तथा शिक्षा के बदलते स्वरूप पर विचार साझा किए। कार्यक्रम की शुरुआत शिक्षा के महत्व और शिक्षक की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए हुई। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान देने वाला नहीं, बल्कि समाज निर्माण का आधार होता है। बदलते समय में शिक्षा के तरीके भले बदल गए हों, लेकिन शिक्षक का समर्पण, संवेदनशीलता और धैर्य आज भी उतने ही आवश्यक हैं। राकेश धस्माना ने ग्रामीण क्षेत्रों में अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि संसाधनों की कमी सीखने में बाधा नहीं बनती, यदि जिज्ञासा और लगन हो। रमा वैश ने शिक्षा को केवल अंक प्राप्ति तक सीमित न रखकर मानवीय मूल्यों के विकास से जोड़ने की बात कही। हेमचंद्र जोशी ने शिक्षक के आचरण को बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण का आधार बताया। नवीन कुमार ने गतिविधि आधारित शिक्षण पर जोर दिया, जबकि सरवरी खातून ने बालिका शिक्षा के महत्व को रेखांकित किया। लक्ष्मी चंद ने अनुशासन को सफलता का मूल बताया। अर्चना द्विवेदी ने प्रत्येक बच्चे के अनुसार शिक्षण पद्धति अपनाने की आवश्यकता बताई।

सुनीता रानी शर्मा ने विद्यालय और अभिभावकों के समन्वय को जरूरी बताया। मालती उपाध्याय ने सामाजिक जागरूकता में शिक्षक की भूमिका पर प्रकाश डाला। पूनम देवी ने सकारात्मक दृष्टिकोण को बच्चों के आत्मविश्वास के लिए आवश्यक बताया। प्रदीप कुमार ने तकनीक के उपयोग के साथ नैतिक मूल्यों को बनाए रखने की बात कही। पूनम सिंह ने बाल मनोविज्ञान की समझ को प्रभावी शिक्षण का आधार बताया। मंजू कपूर ने शिक्षण को सेवा बताया, जबकि डॉ. मीना मदान ने शिक्षकों के निरंतर अपडेट रहने पर जोर दिया। ताहिर हसन ने शिक्षा को सामाजिक समरसता का माध्यम बताया और अजय शर्मा ने हर परिस्थिति में सकारात्मक रहकर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करने की बात कही। कार्यक्रम का संचालन नीलम कंवर ने किया। इस दौरान डॉ. शिवा अग्रवाल, श्रीकांत शर्मा, मोहम्मद युनुस, रवि कुमार गोस्वामी, प्राची, अरुण नौटियाल, महिमा नटराजन, मोनिका, अभिमन्यु सहित कई लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का वातावरण भावनात्मक और प्रेरणादायी रहा। अंत में प्रतिभागियों ने ऐसे संवाद कार्यक्रमों को निरंतर आयोजित करने की आवश्यकता जताई, ताकि अनुभवी शिक्षकों की सीख नई पीढ़ी तक पहुंच सके और शिक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाया जा सके।

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