उत्तराखंड

कलयुग में सतयुग के पत्रकार: राकेश वालिया की सादगी और निष्पक्षता की मिसाल

संतों के बीच भी कायम है विशेष सम्मान, पत्रकारिता में ईमानदारी से बनाई अलग पहचान

कलयुग दर्शन (24×7)

मो नदीम (संपादक)

हरिद्वार। आज के इस कलयुग में जहां पत्रकारिता पर कई तरह के सवाल उठते रहते हैं, वहीं कुछ ऐसे भी पत्रकार हैं जो अपनी सादगी, निष्पक्षता और ईमानदारी से समाज में एक अलग पहचान बना रहे हैं। ऐसे ही व्यक्तित्व के धनी हैं वरिष्ठ पत्रकार राकेश वालिया, जिन्हें लोग “सतयुग का पत्रकार” कहकर संबोधित करते हैं। राकेश वालिया ने अपनी पत्रकारिता के माध्यम से न केवल जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का भी निरंतर प्रयास किया है। उनकी लेखनी में सच्चाई और संतुलन झलकता है, जो उन्हें अन्य पत्रकारों से अलग बनाती है। विशेष बात यह है कि संत समाज के बीच भी वालिया का विशेष सम्मान है। संतों और धार्मिक गुरुओं के बीच उन्होंने अपनी गरिमा, विनम्रता और निष्पक्ष सोच के चलते एक अलग स्थान बनाया है। उनके व्यवहार और कार्यशैली के कारण संत समाज उन्हें एक विश्वसनीय और सम्मानित पत्रकार के रूप में देखता है।

वर्तमान समय में जहां पत्रकारिता में प्रतिस्पर्धा और टीआरपी की होड़ बढ़ती जा रही है, वहीं राकेश वालिया ने अपने मूल्यों से समझौता नहीं किया। उन्होंने हमेशा सत्य और समाजहित को प्राथमिकता दी है। समाज के विभिन्न वर्गों में भी उनकी छवि एक जिम्मेदार और ईमानदार पत्रकार की है, जो बिना किसी दबाव के निष्पक्ष खबरें प्रस्तुत करते हैं। यही कारण है कि लोग उन्हें न केवल एक पत्रकार, बल्कि समाज का सच्चा प्रहरी मानते हैं। राकेश वालिया की यह यात्रा आज के पत्रकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो यह संदेश देती है कि सच्चाई और ईमानदारी के साथ भी पत्रकारिता में सम्मान और सफलता प्राप्त की जा सकती है।

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