विधि विधान के साथ गंगा में विसर्जित की गई महंत जयंती दास की अस्थियां
त्याग, तपस्या और सेवा की प्रतिमूर्ति थे ब्रह्मलीन महंत जयंती दास: महंत रामनौमी दास

कलयुग दर्शन (24×7)
दीपक झा (संवाददाता)
हरिद्वार। ब्रह्मलीन महंत जंयती दास महाराज की अस्थियां पूर्ण विधि विधान और वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ गंगा में विसर्जित की गयी। महंत जयंती दास महाराज का हरियाणा के अंबाला में विगत दिनों निधन हो गया था। बुधवार को ब्रह्मलीन महंत जयंती दास के शिष्य महंत ज्ञान मुनि श्रद्धालु भक्तों के साथ अस्थि कलश लेकर चेतनदेव कुटिया कनखल पहुंचे थे। इसके बाद शोभायात्रा के रूप में अस्थि कलश को कनखल स्थित श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन ले जाया गया। जहां अखाड़े के संतों, महंतों और श्रद्धालु भक्तों ने अस्थि कलश पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद सती घाट पर पूर्ण विधि विधान और वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ अस्थि कलश को गंगा में प्रवाहित किया गया। महंत रामनौमी दास महाराज ने कहा कि महंत जयंती दास महाराज त्याग, तपस्या और सेवा की प्रतिमूर्ति थे।

सनातन को आगे बढ़ाने में उनका योगदान सदैव सभी को प्रेरणा देता रहेगा। श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल के कोठारी महंत जसविंदर सिंह महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन महंत जयंती दास महाराज दिव्य आत्मा थे। सनातन संस्कृति के प्रचार प्रसार के साथ भक्तों को धर्म और अध्यात्म के मार्ग पर अग्रसर करने में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। महंत जयेंद्र मुनि एवं महंत निर्भय सिंह ने कहा कि संत केवल शरीर त्यागते हैं। उनकी आत्मा सदैव भक्तों का मार्गदर्शन करती रहती है। सभी को ब्रह्मलीन महंत जयंती दास महाराज के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। ब्रह्मलीन महंत जयंती दास महाराज के शिष्य महंत ज्ञान मुनि ने सभी संतों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि गुरूदेव के अधूरे कार्यो को आगे बढ़ाते हुए मानव सेवा में योगदान करेंगे। इस अवसर पर महंत राघवेंद्र दास, महंत गोविंददास, महंत जयेंद्र मुनि, महंत निर्भय सिंह, महंत प्रेमदास, महंत अरूण दास, महंत कैलाश मुनि, महंत दर्शन सिंह शास्त्री सहित कई संत महंत और श्रद्धालु भक्त मौजूद रहे।



