उत्तराखंड

कर्बला की शहादत आज भी देती है इंसाफ, सब्र और हक़ पर डटे रहने का पैगाम: इसरार सलमानी

कलयुग दर्शन (24×7)

सागर कुमार (सह संपादक)

हरिद्वार। पूर्व पार्षद इसरार सलमानी ने कहा कि कर्बला की शहादत केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि इंसाफ, सत्य, सब्र और मानवता की रक्षा के लिए दी गई महान कुर्बानी का प्रतीक है। मोहर्रम का महीना हमें हज़रत इमाम हुसैन और उनके साथियों की उस अज़ीम शहादत की याद दिलाता है, जिन्होंने जुल्म और अत्याचार के सामने झुकने के बजाय हक़ और सच्चाई का रास्ता चुना। उन्होंने कहा कि मोहर्रम केवल मातम का नाम नहीं है, बल्कि जुल्म के खिलाफ इंसानियत की सबसे बड़ी आवाज़ है। कर्बला का संदेश हर दौर और हर समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।

इमाम हुसैन ने यह साबित किया कि सत्य और न्याय की रक्षा के लिए किसी भी कुर्बानी से पीछे नहीं हटना चाहिए। इसरार सलमानी ने कहा कि आज के समय में समाज को कर्बला के संदेश को अपनाने की आवश्यकता है। हमें आपसी भाईचारे, प्रेम, सहिष्णुता और इंसाफ के मूल्यों को मजबूत करना चाहिए तथा समाज में शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए मिल-जुलकर कार्य करना चाहिए। उन्होंने सभी लोगों से मोहर्रम के अवसर पर कर्बला के आदर्शों को अपने जीवन में उतारने तथा मानवता, न्याय और सत्य के मार्ग पर चलने का संकल्प लेने का आह्वान किया।

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