कुंभ से पहले सनातन और संत परंपरा को बदनाम करने की साजिश: श्रीमहंत रविंद्रपुरी

कलयुग दर्शन (24×7)
राकेश वालिया (ब्यूरो चीफ)
हरिद्वार। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत डा.रविंद्रपुरी महाराज ने अखाड़ों द्वारा धन लेकर पद दिए जाने के संबंध में वायरल हो रहे वीडियो को भ्रामक और फर्जी करार देते हुए इसे कुंभ से पहले सनातन और संत परंपरा को बदनाम करने की साजिश बताया है। श्रीमहंत डा.रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि हरिद्वार, नासिक और उज्जैन में होने वाले कुंभ पर्वों को लेकर सनातन समाज और संत परंपरा को बदनाम करने के उद्देश्य से तकनीक और एआई का दुरुपयोग कर बनाए गए कथित फर्जी वीडियो से संतों, अखाड़ों और सनातन धर्म की छवि खराब करने का प्रयास किया जा रहा है। श्रीमहंत डा.रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि सोशल मीडिया पर किसी वीडियो के वायरल होने मात्र से उसे सत्य नहीं मान लेना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ विरोधी तत्व एआई तकनीक का सहारा लेकर ऐसी सामग्री तैयार कर रहे हैं, जिससे जनता में भ्रम पैदा हो और संत समाज की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचे। उन्होंने कहा कि सनातन और संत परंपरा को बदनाम करने के लिए सोशल मीडिया को हथियार बनाया जा रहा है, लेकिन ऐसी किसी भी कोशिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा।

उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रशासन से अपील की कि वायरल वीडियो की तकनीकी जांच कर उसकी वास्तविकता सामने लाई जाए और यदि किसी व्यक्ति द्वारा जानबूझकर फर्जी सामग्री तैयार कर प्रसारित की गई है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि कुंभ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे समय में अफवाह, फर्जी वीडियो और भ्रामक प्रचार से संत समाज, अखाड़ों और सनातन संस्कृति की छवि को नुकसान पहुंचाना गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि महामंडलेश्वर पद पैसे से खरीदने का आरोप पूरी तरह भ्रामक है। इस प्रकार का आरोप अखाड़ों की परंपरा और व्यवस्था को गलत तरीके से प्रस्तुत करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि जब किसी संत को महामंडलेश्वर की उपाधि प्रदान की जाती है तो धार्मिक परंपराओं के अनुरूप भंडारा, साज-सज्जा, मंच, साउंड सहित विभिन्न व्यवस्थाएं की जाती हैं, जिनमें खर्च होता है। इन व्यवस्थाओं का खर्च महामंडलेश्वर बनने वाले संत की ओर से किया जाता है। इसे अखाड़े द्वारा महामंडलेश्वर की उपाधि देने के बदले अतिरिक्त धनराशि लेने के रूप में प्रस्तुत करना गलत है।



