उत्तराखंड

संस्कृत को डिजिटल तकनीक और शोध से जोड़ने की जरूरत: राज्यपाल

उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के 12वें दीक्षांत समारोह में 32 छात्र-छात्राओं को गोल्ड मेडल, छह को पीएचडी उपाधि

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नरेश मित्तल (संवाददाता)

हरिद्वार। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने शनिवार को उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के 12वें दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग किया। इस दौरान 32 छात्र-छात्राओं को गोल्ड मेडल और छह छात्रों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। लोक गायिका पद्मश्री माधुरी बड़थ्वाल समेत डॉ. अनुसूया प्रसाद पंत, प्रो. राम कुमार शर्मा और प्रो. रमेश कुमार पाण्डेय को मानद उपाधियों से सम्मानित किया गया। राज्यपाल ने कहा कि संस्कृत केवल प्राचीन भाषा नहीं, बल्कि भारत की ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक चेतना की प्रमुख वाहक है। इसे आधुनिक तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, भाषा-विज्ञान और मशीन लर्निंग से जोड़कर शोध के नए अवसर तलाशने की जरूरत है। उन्होंने विद्यार्थियों से ज्ञान, संस्कार, समाजसेवा, नवाचार और राष्ट्रसेवा को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

उन्होंने विश्वविद्यालय को करीब दस हजार दुर्लभ पुस्तकें दान करने के लिए पद्मश्री अभिराज राजेन्द्र मिश्र का आभार जताया। समारोह की विशेष बात रही कि राज्यपाल ने अपना संबोधन संस्कृत भाषा में दिया। संस्कृत शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने संस्कृत को वैज्ञानिक और कंप्यूटर अनुकूल भाषा बताते हुए विश्वविद्यालय में शोध एवं बहुशास्त्रीय अध्ययन को बढ़ावा देने की बात कही। कुलपति प्रो. रमाकांत पाण्डेय ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं शोध उपलब्धियों की जानकारी दी। समारोह में जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर, प्रो. राघवेन्द्र प्रसाद तिवारी, शिक्षकगण एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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