परम् कल्याणकारी है श्रीमद् भावगत कथा: श्रीमहंत साधनानंद

कलयुग दर्शन (24×7)
राकेश वालिया (ब्यूरो चीफ)
हरिद्वार। भूपतवाला स्थित झालावाड़ आश्रम में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के समापन पर श्रद्धालु भक्तों को कथा के विभिन्न प्रसंगों का श्रवण कराते हुुए कथाव्यास श्रीमहंत साधनानंद महाराज ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा परम् कल्याणकारी और कल्पवृक्ष के समान है। जिससे सभी इच्छाओं की सहज ही पूर्ति की जा सकती है। लेकिन कथा सुनना ही पर्याप्त नहीं है। आवश्यकता कथा श्रवण से मिले ज्ञान को आचरण में धारण करने की है। श्रीमहंत साधनानंद महाराज ने कहा कि प्राचीन काल में पुण्य प्राप्ति और कल्याण के लिए अनेक यत्न करने पड़ते थे। लेकिन कलियुग में श्रीमद् भागवत कथा श्रवण के प्रभाव से पुण्य प्राप्ति के साथ कल्याण का मार्ग भी प्रशस्त हो जाता है। श्रद्धालु भक्तों को परीक्षित मोक्ष का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि तक्षक नाग के डसने से मृत्यु का श्राप मिलने पर राजा परीक्षित ने सांत दिन गंगा तट पर श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण किया।

कथा के प्रभाव से मृत्यु को लेकर उनका भय दूर हो गया और तक्षक के डसने के बाद उन्हें श्रीहरि के धाम बैकुंठ लोक में स्थान प्राप्त हुआ। सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए श्रीमहंत साधनानंद ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता, मित्रता का आदर्श प्रस्तुत करती है। भगवान श्रीकृष्ण ने दीन हीन अवस्था में जीवन व्यतीत कर रहे अपने बाल सखा और परम् भक्त सुदामा की दरिद्रता दूर समाज को संकट में मित्र का साथ देने का संदेश दिया। कथा के समापन पर मुख्य यजमान मधुबेन जोशी व हितेश भाई जोशी ने व्यास पीठ का पूजन और आरती कर कथाव्यास श्रीमहंत साधनानंद महाराज से आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर कई संत महंत और गुजरात से आए श्रद्धालु भक्त मौजूद रहे।



