माया की अंधी दौड़ में मनुष्य भूल रहा है अपने जीवन का वास्तविक उद्देश्यः साध्वी गार्गी भारती

कलयुग दर्शन (24×7)
अबलीश कुमार (सहारनपुर संवाददाता)
सहारनपुर। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के तत्वावधान में रविवार को सहारनपुर स्थित सत्संग आश्रम में साप्ताहिक सत्संग कार्यक्रम का आयोजन श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु संगत ने उपस्थित होकर आध्यात्मिक विचारों का श्रवण किया। इस अवसर पर आशुतोष महाराज की शिष्या एवं आश्रम कोऑर्डिनेटर साध्वी सुश्री गार्गी भारती ने अपने सत्संग प्रवचनों के माध्यम से मानव जीवन के वास्तविक उद्देश्य पर प्रकाश डाला। साध्वी जी ने कहा कि आज का मनुष्य माया की अंधी दौड़ में लगातार भाग रहा है। धन, संपत्ति, सुख-सुविधाओं, पद और प्रतिष्ठा को प्राप्त करने की चाह में वह अपने जीवन का बहुमूल्य समय व्यतीत कर देता है। मनुष्य सांसारिक उपलब्धियों को ही जीवन की सफलता मान बैठा है, जबकि जीवन का वास्तविक उद्देश्य अपने भीतर विद्यमान परमात्मा को जानना और आत्मिक शांति को प्राप्त करना है। उन्होंने कहा कि जब-जब मानव समाज अज्ञानता के अंधकार में डूबा है, तब-तब संतों और महापुरुषों ने धरती पर आकर मानव को उसकी वास्तविक पहचान से परिचित कराने तथा उसे अज्ञानता की निद्रा से जगाने का प्रयास किया है। लेकिन आज मनुष्य अपनी अज्ञानता रूपी निद्रा में इस प्रकार सोया हुआ है कि संतों की वाणी भी उसके अंतर्मन को जागृत नहीं कर पा रही है। साध्वी गार्गी भारती जी ने कहा कि आज प्रत्येक व्यक्ति बाहर से धार्मिक दिखाई देता है। कोई पूजा-पाठ करता है, कोई कर्मकांड में लगा है तो कोई विभिन्न धार्मिक गतिविधियों में अपना समय व्यतीत करता है, लेकिन केवल बाहरी आडंबर और कर्मकांड से परमात्मा की वास्तविक अनुभूति संभव नहीं है। मनुष्य को आवश्यकता है ऐसे पूर्ण संत के मार्गदर्शन की, जो उसे परमात्मा का प्रत्यक्ष अनुभव कराने वाला आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान कर सके। उन्होंने कहा कि जिस मनुष्य के जीवन में पूर्ण संत का आगमन हो जाता है, उसके जीवन की दिशा ही बदल जाती है। उसके विचारों, कर्मों और जीवन जीने के दृष्टिकोण में सकारात्मक परिवर्तन आने लगता है।

वह समझने लगता है कि मानव जीवन केवल भौतिक सुखों को अर्जित करने के लिए नहीं, बल्कि अपने वास्तविक स्वरूप को जानने और परमात्मा से जुड़ने के लिए मिला है। साध्वी जी ने बताया कि वर्तमान समय में श्री आशुतोष महाराज जी द्वारा ब्रह्मज्ञान के माध्यम से मानव को आत्मजागृति का संदेश दिया जा रहा है। संस्थान के अनुसार ब्रह्मज्ञान को आत्म-साक्षात्कार एवं परमात्मा के अनुभव की आध्यात्मिक साधना के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। उन्होंने कहा कि जब साधक ब्रह्मज्ञान के माध्यम से अपने भीतर विद्यमान दिव्य प्रकाश का अनुभव करता है और नियमित रूप से ध्यान-साधना करता है, तो उसके जीवन में आत्मिक परिवर्तन की प्रक्रिया प्रारंभ होती है। साधना के माध्यम से मनुष्य अपने भीतर झांककर अपने कर्मों, संस्कारों और जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। साध्वी गार्गी भारती जी ने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि मनुष्य केवल बाहरी धार्मिकता तक सीमित न रहे, बल्कि अपने भीतर के परमात्मा को जानने का प्रयास करे। जब व्यक्ति स्वयं के भीतर आध्यात्मिक जागृति लाता है, तभी परिवार, समाज और राष्ट्र में भी सकारात्मक परिवर्तन संभव है। साप्ताहिक सत्संग के दौरान श्रद्धालुओं ने भजन, सत्संग एवं ध्यान-साधना का लाभ प्राप्त किया। कार्यक्रम का वातावरण भक्तिमय एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत रहा। अंत में संगत को नियमित सत्संग, ध्यान-साधना एवं मानव जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझते हुए आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ने का संदेश दिया गया।



