कुंभ-2027 को लेकर संत आश्रम परिषद ने उठाई आवाज, संवाद और प्रतिनिधित्व की मांग

कलयुग दर्शन (24×7)
दीपक झा (संवाददाता)
हरिद्वार। अखिल भारतीय संत आश्रम परिषद ने कुंभ-2027 की तैयारियों में आश्रमधारी संतों की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए मेला प्रशासन से शीघ्र संवाद और प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की मांग की है। प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानन्द गिरी महाराज और राष्ट्रीय महामंत्री राम विशाल दास महाराज ने कहा कि 19 जून को कुंभ मेलाधिकारी को आश्रमों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया था, लेकिन अब तक न तो कोई औपचारिक जवाब मिला और न ही परिषद को किसी बैठक या परामर्श के लिए बुलाया गया। उन्होंने कहा कि कुंभ केवल प्रशासनिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन धर्म की जीवंत आध्यात्मिक परंपरा का प्रतीक है। इसकी सफलता के लिए अखाड़ों के साथ-साथ आश्रमों, मठों और स्वतंत्र संत परंपराओं को भी समान सम्मान और सहभागिता मिलनी चाहिए। उनका कहना था कि हरिद्वार के हजारों आश्रम ही कुंभ के दौरान लाखों श्रद्धालुओं को आवास, भोजन, चिकित्सा, सत्संग और आध्यात्मिक मार्गदर्शन जैसी सेवाएं उपलब्ध कराते हैं, मेला प्रशासन को उनकी सुविधाओं का भी ध्यान रखना चाहिए।

परिषद ने मेला प्रशासन से अपील की कि वह किसी के प्रभाव में आने के बजाय सभी संत परंपराओं को साथ लेकर कुंभ की तैयारियां करे। परिषद पदाधिकारियों ने कहा कि अखाड़ा परिषद से जुड़े आंतरिक विवादों के कारण संत समाज की छवि प्रभावित हुई है और ऐसे समय में टकराव नहीं, बल्कि समन्वय और संवाद की आवश्यकता है। उन्होंने कहाकि मेला प्रशासन अखाड़ों के चार-छह गैंगधारियों के चंगुल से निकले। यदि ऐसा नहीं होता है तो बिना संतों के मेला संभव नहीं है। कहाकि अखाड़ा परिषद के सेंटिग-गैटिंग वाले कभी भी मेला प्रशासन को धोखा दे सकते हैं। मेला प्रशासन इनके बहकावे में न आए। कहा कि अखाड़ा परिषद को लेकर आपस में लड़ रहे हैं, अच्छी बात है, किन्तु धर्म विरोधियों के साथ लड़े तो ज्यादा अच्छा होगा। अखाड़ा परिषद के नाम पर कुछ लोग अपनी राजनैतिक रोटियां सेकने का कार्य कर रहे हैं। परिषद के महामंत्री राम विशाल दास ने कहाकि मेला प्रशासन अखाड़ा केन्द्रीत न हो, उसे आश्रम केन्द्रीत होना चाहिए। आश्रमधारियों को महत्व देना चाहिए। आश्रमधारियों की उपेक्षा किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि दिव्य व भव्य कुंभ का आयोजन करना है तो आश्रमधारियों को महत्व देना होगा। उन्होंने उत्तराखंड सरकार और कुंभ मेला प्रशासन से 19 जून के ज्ञापन पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई, औपचारिक संवाद तथा कुंभ-2027 की व्यवस्थाओं में आश्रमों को सक्रिय भागीदारी देने की मांग दोहराई। प्रेसवार्ता के दौरान चन्द्रभूषणानंद, स्वामी कमलेशानंद व सत्यव्रतानंद आदि मौजूद रहे।



